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अद्भुत रहस्य; इंसानों के अलावा यहां नाग-नागिन का जोड़ा भी करता है भोलेनाथ की पूजा ‘ॐ नमः शिवाय’

भारत में मंदिरों की कमी नहीं है कहा जाता है अगर किसी को हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के बारे में जानकारी प्राप्त करनी हो तो उसे यहां के अनेकों मंदिर के दर्शन कर लेने चाहिए। मान्यताओं की मानें तो अगर बात की जाए कि यहां सबसे अधिक मंदिर किस देवी-देवता के हैं तो शायद सबकी ज़ुबान पर एक ही नाम आता है, “देवों के देव महादेव”.12 ज्योर्तिलिंगों के अलावा देश के कई विभिन्न राज्यों में शिव जी अपने लिंग रूप यानि स्वयंबू शिवलिंग के रूप में मौज़ूद हैं। बता दें स्वयंबू शिवलिंग से अर्थात जो स्वयं प्रकट हुआ हो जिसे किसी के भी द्वारा निर्मित नहीं किया गया हो। तो आज हम आपके लिए लेकर आएं हैं शिव जी के इन्हीं मंदिरों में से एक खास शिव मंदिर के बारे में।

हम बात कर रहे हैं हरियाणा के पेहोवा के नज़दीक अरूणाय स्थित श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर की, यहां की लोक मान्यताओं के अनुसार यहां हर साल महाशिवरात्रि पर इंसानों के साथ-साथ नाग-नागिन का एक जोड़ा भी शिवलिंग की पूजा करता है। हम जानते हैं आपको सुनकर थोड़ा डर गए होंगे साथ ही चौकें भी होंगे। परंतु आपको बता दें ये सच है और आज तक इन्होंने किसी भी श्रद्धालु को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया।यहां के एक महंत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यहां हर साल महाशिवरात्रि के दिन नाग-नागिन का जोड़ा शिव प्रतिमा की परिक्रमा करता रहता है। पुराणों में वर्णन मिलता है यहां भगवान शिव स्वंय लिंग रूप में प्रकट हुए थे, जो स्वंयभू लिंग के रूप में मुख्य मंदिर में आज भी विराजमान हैं

इस मंदिर की खास बात ये है कि यहां शिवलिंग पर जलाभिषेक व पूजन करवाने तथा स्थित बेल वृक्ष पर धागा बांधने की परंपरा प्रचलित है। माना जाता है ऐसा करने से हर मन्नत पूरी होती है। जिसके बाद लोग यहां आकर पूजा करवाते हैं व धागा खोलकर जाते हैं।इस मंदिर से जुड़ी एक और अनोखी बात ये है कि यहां दूध बिलोकर मक्खन नहीं निकाला जाता। अगर कोई ऐसा करता भी है तो दूध खराब होकर कीड़ों में बदल जाता है। मंदिर परिसर में खाट अर्थात बिस्तर का प्रयोग नहीं किया जाता। तो वहीं अगर कोई व्यक्ति यहां अशुद्धि फैलाने का प्रयास करता है तो उसे अवश्य दंड मिलता है।

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