अपनों द्वारा ठुकराई गई मासूम बच्ची को अविवाहित महिला ने गोद लिया। बेसहारा बच्ची को मां का सहारा मिला तो कुंवारी महिला को मां का सुख। इस पल का गवाह बना खबड़ा स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान। निजी कंपनी में जॉब करने वाली दिल्ली निवासी 44 वर्षीय अनुराधा बोस अपने पिता, छोटी बहन के पति व भाई के साथ बच्ची को गोद लेने यहां पहुंची। गोद देने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दो वर्ष की मासूम बच्ची को महिला के हवाले किया गया। जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक उदय कुमार झा, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी चंद्रदीप कुमार व दत्तक ग्रहण संस्थान की समन्वयक अनुपमा ने गोद देने की प्रक्रिया को पूरा कराया। सहायक निदेशक उदय कुमार झा ने बताया कि बच्ची को गोद लेने के लिए महिला ने 19 जनवरी 2019 को ऑनलाइन आवेदन किया। उसके बाद कई कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। बाल संरक्षण पदाधिकारी चंद्रदीप कुमार ने कहा कि गोद देने की प्रक्रिया में बच्चों की सुरक्षा एवं भविष्य का पूरा ख्याल रखा जाता है।
गोद देने में कई कानूनी प्रक्रिया होती पूरी, ऑनलाइन आवेदन
बच्चा गोद लेने के लिए समाज कल्याण विभाग की साइट पर ऑनलाइन आवेदन होता है। बच्चों की सुरक्षा एवं भविष्य को लेकर कई चरणों में कानूनी प्रकिया पूरी की जाती है। गोद दिए गए बच्चे की जांच समय समय पर विभाग द्वारा की जाती है। गोद लेने वाले दंपती का शारीरिक व मानसिक रूप ये स्वस्थ होना अनिवार्य है। आर्थिक दृष्टि से सक्षम होना भी ज़रूरी है। संतान हो या न हो, वे बच्चा गोद ले सकते हैं। इसके लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होता है। अविवाहित महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है। अविवाहित पुरुष सिर्फ लड़के को ही गोद ले सकता है। इसके साथ ही कई सख्त नियम हैं।





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