
वहां केमिस्ट मनीष ने सलाह देने के बजाय उसे दो दिन की दवाई दे दी। माता-पिता दवाई लेकर घर आ गए और बच्ची को खिला दी। जब आराम नहीं हुआ तो गुरुवार को दोबारा मेडिकल स्टोर पर पहुंच गए। इस दौ”रान मनीष ने खुद ही बच्ची को इंजे’क्शन लगा दिया। इसके करीब 15 मिनट बाद बच्ची की त’बीयत ते’जी से बि’गड़ने लगी। माता-पिता तुरंत उसे अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों के उप’चार से पहले ही उसकी मौ’त हो गई। वहां से पुलिस को मामले की सूचना दी गई। डीसीपी, शाहदरा अमित शर्मा ने बताया कि बच्ची के माता-पिता के बयान पर केस दर्ज कर आरोपी केमिस्ट को गि”रफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की प्रा’थमिक जां’च में केमिस्ट की ला’परवाही सामने आई। उसने बच्ची को डॉक्टर के पास भेजने की जगह खुद ही उ”पचार शुरू कर दिया।

दवाई से ठीक नहीं होने पर इं’जेक्शन भी लगा दिया। इससे बच्ची की मौ’त हो गई। परिजनों के बयान पर पुलिस ने केस द’र्ज कर आ’रोपी केमिस्ट को गि’रफ्तार कर लिया। डॉक्टरों के अनुसार, मा’मले में बच्ची के माता-पिता की भी ला’परवाही रही। किसी अस्पताल में उ’पचार कराने के बजाय वे केमिस्ट की बातों में उ’लझे रहे। यदि बात पैसे की थी तो परिजन किसी भी सरकारी अस्पताल में लेकर जाते तो केमिस्ट से कम रुपये में ही बच्ची का उ’पचार हो सकता था।



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