आंधी-तूफान में जिले की चरमराई विद्युत व्यवस्था कुछ जगहों को छोड़ सभी इलाकों में शनिवार की शाम तक दुरुस्त कर ली गई। विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि यह तूफान असहज था। इससे निपटने की पूरी कोशिश की गई। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक बिजली कर्मी आंधी-तूफान और भारी बारिश के बीच कार्य पर डटे रहे।
विभाग को करीब 10 लाख की क्षति
चक्रवात यास से जिले के सभी डिविजनों में करीब 150 बिजली पोल, 12 ट्रांसफॉर्मर और दस किलोमीटर तार पेड़ों से टकरा कर गिरने से क्षतिग्रस्त हो गए। विद्युत अधीक्षण अभियंता रीतेश कुमार ने बताया कि जिले में टीम की मुस्तैदी के कारण ज्याद नुकसान नहीं हुआ। क्षति का आकलन किया जा रहा है।
इन इलाकों में तीन दिनों बाद भी नहीं लौटी बिजली
कांटी, मीनापुर, सकरा, टाउन थ्री आदि इलाके में तीन दिनों बाद भी बिजली नहीं लौटने पर कोहराम मचा रहा। हालांकि शाम तक कुछ इलाकों को छोड़ सभी जगहों पर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई, लेकिन मीनापुर पंचायत के वार्ड 9, 10, 11, 12 और मदारीपुर कर्ण, मुस्तफापुर आदि इलाके में शाम छह बजे तक बिजली नहीं आई थी। छात्र राजद के प्रदेश महासचिव अमरेंद्र कुमार ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से ई-मेल भेज कर की है। इलाके के एसडीओ, जेई व लाइनमैन पर भारी लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एक फ्यूज कॉल जोडऩे के लिए भी कई अधिकारियों से वार्ता करनी पड़ती है। जबकि विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने पर भी काम नहीं हो रहा। जबकि आधे घंटे में फ्यूज कॉल दुरुस्त कर देना है, लेकिन ऐसा नहीं होने से उपभोक्ताओं में आक्रोश गहरा रहा है।
जगह-जगह तारों का संजाल
अब भी जिले में बिजली आपूर्ति की वर्षों पुरानी आधारभूत संरचना है। जगह-जगह तारों का संजाल है। बीच सड़क पर पोल है। जबकि केंद्र प्रायोजित समेकित ऊर्जा विकास योजना से बिजली के कार्य हो रहे हैं, लेकिन वह भी जैसे-तैसे पूरा किया जा रहा है। पोल-तार लगाकर छोड़ दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्र के मिस्कॉट, मिठनपुरा, बेला औद्योगिक क्षेत्र सुतापट्टी, सरैयागंज सहित अन्य इलाकों में उसी तरह तार झूल रहे हैं जैसे पहले झूलते नजर आ रहे थे। ठीकेदार भी जल्दी के चक्कर में तार टाइट करना भूल जा रहे। हालांकि पावर सब स्टेशनों की संख्या बढ़ी है, लेकिन जिस इलाके में तार-पोल और ट्रांसफॉर्मर बदले जा रहे, उन इलाकों में इसकी अच्छी स्थिति नहीं दिखाई दे रही। विद्युत कार्य कर रही कंपनियों का दावा है कि कोरोना काल नहीं रहता तो शायद जिले में 10 फीसद भी काम नहीं बचता।





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