सरसों तेल की कीमत पिछले एक साल में बढ़कर दोगुनी हो गई है। इसके कारण आम लोगों को इस महंगाई से राहत नहीं मिल पा रही है। पिछले साल कोरोना काल से लेकर इस दूसरे कोरोना काल में खाद्य पदार्थों में खासकर सरसों तेल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। बता दें कि मई माह में सरसों तेल की कीमत 90 रुपये लीटर था। अब बढ़कर अब 170 रुपये लीटर से 186 रुपये तक हो गई है। कुछ ब्रांडों में तो 206 रुपये तक मूल्य बढ़ गए हैं। जबकि जिला में सरसों की फसल पैदावार में काफी बढ़ोतरी हुई थी। कृषि मंत्रालय ने इस मामले पर बहुत हद तक सरसों तेल, रिफाइंड ऑयल तेल पर गंभीरता से नियंत्रण करने की प्रयास किया लेकिन विभाग द्वारा इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। और देखते देखते तेलहन की कीमतों में काफी उछाल आ गई। सबसे बड़ी बात यह भी है कि अधिकांश जगहों पर किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिकतम मूल्य पर सरसों की ब्रिकी की थी।
सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य 46.5 रुपये प्रति किलो है। जबकि ज्यादातर जगहों पर थोक बाजार में इसे 5 हजार रुपये प्रति ङ्क्षक्वटल यानी 50 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा गया। बाजार समिति में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में सरसों तेल रिफाइंड ऑयल और भी कई प्रकार की खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसी प्रकार से खाध पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होने से आम लोगों को काफी बजट कम हो गई है।शहर में लगातार कोरोना काल में स्वास्थ्य रहने के लिए खाने पीने की सामग्रियों में भी काफी बढ़ोतरी हो गई है। इस संबंध में बाजार समिति के व्यापारी मनोज कुमार साह ने बताया कि खाध पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होने का मुख्य कारण है कि उत्पादन जितनी होनी चाहिए उतनी नहीं हो रही है। बाहर से सामान भरपूर मात्रा में सामान नहीं आ रहा है। हालांकि खुदरा विक्रेताओं द्वारा अधिक कीमत पर बेची जानी की बात सामने आ रही है।





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