-वेक्टर जनित रोगों की स्थितियों का डॉ रविन्द्र ने लिया जायजा
- डेंगू, कालाजार और एईएस/चमकी पर हुई चर्चा
- वेक्टर रोगों के प्रति प्रचार-प्रसार पर दिया जाएगा जोर
सीतामढ़ी, 25 मई।
आने वाले मानसून और चमकी के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए भीबीडी कार्यालय में वेक्टर रोगों की रोकथाम पर चर्चा की गयी। चर्चा में डीभीबीडीसी पदाधिकारी डॉ रविन्द्र कुमार यादव ने कहा कि कालाजार नियंत्रणार्थ सिन्थेटिक पायरेथॉयराइड का छिड़काव समाप्ति की ओर है। यह छिड़काव 5 मार्च से शुरू हुआ था। जिसमें 54 दल ने कालाजार प्रभावित कुल 151 गांवों में से 145 गांवों में छिड़काव कर लिया है। 16 प्रखण्डों के विरुद्ध अब केवल परिहार,सोनबरसा,डुमरा,नानपुर बथनाहा और रून्नीसैदपुर में 4 प्रतिशत कार्य शेष रह गये हैं। छिड़काव के लिए 66 दिनों का लक्ष्य रखा गया था।
डेंगू को पनपने से रोकने में स्वच्छता कारगर
डॉ रविन्द्र ने कहा कि डेंगू गंदगी से पनपने वाले मच्छर से होने वाला रोग है। हम अपने आस पास की जगहों को जितना साफ रखेंगे इस मच्छर के लार्वा को पनपने का मौका नहीं मिलेगा। डेंगू नहीं होने देने का सरल उपाय है कि इसके लार्वा को ही नहीं पनपने देना। डेंगू के लार्वा हमेशा साफ पानी में ही पनपते हैं। इसलिए या तो हम अपने घर के आस -पास किसी तरह का पानी जमा ही नहीं होने दें या तो उसमें मिट्टी का तेल देने से पानी पर पृष्ठ तनाव काम करता है और लार्वा उसमें डूब जाते हैं।
जिले से चमकी के चार मरीज
डॉ रविन्द्र कुमार यादव ने बताया कि अभी तक जिले से चमकी के चार मरीजों की पहचान हुई है। यह चमकी पर व्यापक प्रचार -प्रसार का ही नतीजा है। इसके साथ ही सभी प्रखंडों में चमकी के उपचार की वृहत व्यवस्था के कारण भी संभव हो पाया है। लोगों में जागरूकता आयी है। कोविड के बावजूद भी एईएस के उपचार में किसी तरह की कमी नहीं है। संसाधन के साथ सारी दवाइया भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं ।
आज जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी सह अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डा रवीन्द्र कुमार यादव ने कार्यालय मे सभी भीबीडीएस ,भीडीसीओ तथा केयर ईण्डिया के डीपीओ के साथ कालाजार ,एईएस तथा डेंगू को लेकर समीक्षात्मक बैठक की। जिला मे अबतक 4 एईएस के मरीज चिह्नित हुए हैं और सभी इलाज के बाद पूर्णतया स्वस्थ हैं।




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