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मुजफ्फरपुर में लालटेन पार्टी की जगहंसाई, कागजी सेवा पर लोग कर रहे थू-थू

जिले में लालटेन पार्टी के नेताओं की दमदार उपस्थिति है। आधा दर्जन तो पटना वाले सदन के सदस्य भी हैं। उनमें से एक ने बड़े नेताजी से बातचीत के बाद जिले में पार्टी की तरफ से मरीजों की सेवा के लिए कोविड केयर सेंटर खोलने का एलान किया। अखबारों और इंटरनेट मीडिया पर जमकर वाहवाही लूटी। एक सप्ताह बीत गए, लेकिन न उनका कोविड केयर सेेंटर खुला और न ही आने वाले समय में खुलता ही दिखाई दे रहा है। नेताजी अब परेशान हैं। करें तो क्या करें। पहली बार कुर्सी मिली है। हाईकमान के कहने पर कोविड सेंटर खोलने की घोषणा कर दी, लेकिन अब वह इस सवाल पर भागते नजर आ रहे हैैं। न उनके पास सेंटर खोलने की सुविधा है और न ही किसी को देने लायक जवाब। वहीं लालटेन में तेल भर रहे जिले के कुर्सीधारी नेता भी इस सवाल पर चुप्पी साधे हैैं।

चमक रहा नेताजी का चेहरा

इन दिनों शहर में कोरोना को मारने की होड़ मची है। कोरोना को मारने के लिए हर कोई स्प्रे मशीन लेकर निकला हुआ है। इस होड़ में गली के नेता से लेकर शहर की राजनीति के किंग मेकर तक शामिल हैं। उनके द्वारा किए जा रहे छिड़काव से कोरोना मरे या न मरे नेताजी का चेहरा जरूर चमक रहा है। छोटी और बड़ी मशीनों से किए जा रहे छिड़काव में पानी के साथ दवा है कि नहीं यह बताना मुश्किल है। कोरोना को मारने का मुख्य मुकाबला शहर के दो बड़े नेताओं के बीच चल रहा है। दोनों के चेला-चपाटी जितना कोरोना मारने की दवा का छिड़काव नहीं कर रहे उससे ज्यादा इंटरनेट मीडिया पर अपने राजनीतिक आका का गुणगान कर रहे हैं। दोनों की होड़ में अपने को पिछड़ते देख गली वाले नेता भी छिड़काव करते अपनी तस्वीर को इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर रहे हंै ताकि उनका भी चेहरा चमकता रहे।

आखिर कब स्मार्ट होंगे हम

स्मार्ट सिटी में रहने का सपना कब पूरा होगा। हम कब स्मार्ट होंगे ये सवाल इन दिनों शहर में उठ रहे हैैं। दो माह पूर्व ऐसा लगा कि अब हम स्मार्ट होने वाले हैं, लेकिन कंपनी के पटना वाले हाकिम ने गति को विराम लगा दिया। कंपनी की गाड़ी को गति देने वाले सभी लोगों को बदल दिया। फिर से कंपनी की गाड़ी को चलाने के लिए नए अधिकारी आए हैं। अब उनको कंपनी की गाड़ी चलानी है, लेकिन कहीं काम शुरू होते ही उनको भी चलता न कर दिया जाए इसलिए वे अभी गाड़ी की सवारी नहीं कर रहे हैं। शहरवासी मान गए हैं कि यह शहर स्मार्ट नहीं होने वाला। हालांकि सफाई महकमे के साथ कंपनी का जिम्मा उठाने वाले स्मार्ट अधिकारी से कुछ लोगों को आशा की किरण जरूर दिख रही है।

पानी में लाठी पीट रहा महकमा

शहरवासियों को जलजमाव की सालाना पीड़ा से मुक्ति दिलाने का जिम्मा सफाई महकमे के पास है। महकमा लोगों को इससे निजात दिलाने के लिए नाला में लाठी पीट रहा है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। बारिश का पानी शहर से बाहर निकल सके इसकी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में नाला को कितना भी साफ कर दिया जाए पानी शहर से बाहर निकलने वाला नहीं। हालांकि महकमे के युवा हाकिम इस बार शहर में पानी नहीं लगने देंगे। इसके लिए अड़े हुए हैं। उन्होंने अपने मातहत अधिकारियों और अभियंताओं को भी नाला उड़ाही के काम में लगा दिया है। यही नहीं जिन इलाकों में पानी लगेगा उस इलाके के अधिकारी नपेंगे इसकी भी चेतावनी दे दी गई है। हालांकि जब बारिश होगी तो दम तोड़ चुके पुराने नाले और उसके बाद के दिनों में बिना योजना के बने नाले युवा अधिकारी को निराश कर सकते हैैं।  

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