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मुजफ्फरपुर में काेराेना की मा’र / पुलिस की मनमानी से लीची बेचना ताे दूर, किसान फल भी नहीं ताेड़ रहे

शाही लीची की तुड़ाई और निर्यात के सीजन में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लगातार दूसरे साल लॉकडाउन के कारण किसानों की कमर टूट रही है। एक ताे पहले ही शाही लीची में 40 प्रतिशत कम फलन हुअा। ऊपर से अब लॉकडाउन के नियमों की धौंस देकर पुलिस लीची किसानों, ढुलाई करने वालों और यहां तक कि मजदूरों काे भी तंग कर रही है।

ऐसे में विश्व प्रसिद्ध शाही लीची तोड़ना भी किसानों के लिए मुश्किल काम हो गया है। 2019 तक लीची खरीदार व्यापारी अप्रैल से ही यहां डेरा डाल देते थे। 2020 में और इस साल भी दूसरे राज्याें के वे व्यापारी नहीं अाए। इससे स्थानीय किसानों काे फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, ताे देश में महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्याें के लाेगाें काे शाही लीची खाने काे नहीं मिल पा रही है। साथ ही खाड़ी देशाें, इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया और अमेरिका के कुछ प्रांतों में निर्यात भी नहीं हाे पा रहा है। स्थानीय पुलिस की कार्यशैली के कारण मजदूर लीची बागान नहीं पहुंच पा रहे हैं।

इसके निदान के लिए बिहार लीची उत्पादक संघ के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। लीची किसानों ने काफी मुश्किलों का सामना करने के बाद बागों की सिंचाई की। दवा का छिड़काव किया। बस इस आस में कि शायद पिछले साल के नुकसान की कुछ भरपाई हाे सके। लेकिन, अब लीची फसल तैयार होने पर व्यापारी और किसानों को पुलिस परेशान कर रही है।

बच्चा प्रसाद सिंह के अनुसार मुशहरी, अहियापुर और पियर समेत अधिकतर थाना झेत्राें और जिलाें में एेसे ही हालात हैं। हालांकि, डीएसपी पूर्वी ने शिकायत के बाद अहियापुर और पियर थाने में पकड़े गए किसान और मजदूरों को रिहा करा वाहन मुक्त करा दिए। लेकिन, बाकी जगहाें पर स्थिति जस की तस है। लीची उत्पादक संघ शुक्रवार काे प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारियों से शुक्रवार को मिल कर मदद की गुहार लगाएगा।

प्रशासन के आदेश के बाद भी पुलिस कर रही परेशान

लीची टास्क फोर्स के सदस्य किसान अनिल त्रिपाठी के अनुसार डीएम ने पूरी जानकारी एसएसपी के जरिए सभी थाना प्रभारियों को भेजी है। लीची किसानों की समस्याओं की जानकारी के साथ आवागमन, निर्बाध वाहन परिचालन, लीची लोडिंग स्थल का निर्धारण और मजदूरों काे अाने-जाने की छूट देने काे कहा गया है। लेकिन, इसके बाद भी विभिन्न थाना क्षेत्रों में जान-बूझकर लीची किसानाें, व्यापारियों और मजदूरों को परेशान किया जा रहा है।

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