बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौ’न शो’षण मा’मले (Muzaffarpur Shelter Home Case) में दिल्ली की साकेत कोर्ट (Saket Court) को गुरुवार को फैसला सुनाना था, लेकिन यह एक बार फिर ट’ल गया। अ’तिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ के अवकाश पर होने के कारण ऐसा हुआ। उनकी अनुपस्थिति में कामकाज देख रहे जज नई तारीख मु’कर्रर करेंगे। इसके पहले सात महीने की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। नवंबर में भी वकीलों की ह’ड़ताल के कारण कोर्ट का फैस’ला एक बार टल चुका था।सीबीआइ (CBI) ने इस मा’मले में ब्रजेश ठाकुर (Brajesh Thakur) को मुख्य आ’रोपी बनाया है।

कोर्ट कल ब्रजेश ठाकुर समेत कुल 20 आ’रोपितों के खि’लाफ पॉ’क्सो कानून, दुष्कर्म आप’राधिक साजिश समेत अन्य धा’राओं में स’जा का एला’न करेगी।मुजफ्फरपुर के बालिका गृह की 40 लड़कियों की प्र’ताड़ना व दु’ष्कर्म से जुड़े इस बड़े मा’मले का खुला’सा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट (Social Audit Report) से हुआ था। बाद में इ’सकी जांच सीबीआइ को सौंपी गई। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मा’मले को बिहार से दिल्ली के साकेत कोर्ट में ट्रां’सफर कर दिया था। मा’मले की मॉनीटरिंग (Monitoring) सुप्रीम कोर्ट कर रहा है।

मुंबई के ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस’ (TISS) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में बिहार के विभिन्न बालिका गृहों में शारीरिक प्र’ताड़ना व यौ’न शो’षण के मा’मले का खुलासा हुआ था। ‘टिस’ ने यह’ रिपोर्ट 31 मई 2018 को राज्य सरकार (Bihar Government) को सौंप दी थी। इसी रिपोर्ट से मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौ’न शो’षण कां’ड का खुलासा हुआ था। बाद में 28 जुलाई को मुजफ्फरपुर बालिका गृह की 42 में से में से 34 लड़कियों से दु’ष्कर्म की पुष्टि हुई। एक लड़की ने अपने बयान में वहां एक लड़कियों की ह’त्या तक की बात कही।
सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग में सीबीआइ जांच
‘टिस’ की रिपोर्ट के आधार पर जिला बाल कल्याण संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने मुजफ्फरपुर महिला थाना में बालिका गृह का संचालन करने वाली स्वयंसेवी संस्था ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ के संचालकों व अन्य के खि’लाफ एफआइआर द’र्ज क’रायी। कालक्रम में इस मा’मले की परतें एक-एक कर उतरती गईं। मा”मला सीबीआइ के हाथों में चला गया और सुप्रीम कोर्ट इसकी मॉ”नीटरिंग करने लगा।
साकेत कोर्ट में सात महीने चली सु’नवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बीते सात फरवरी को मा”मला को सुनवाई के लिए बिहार से दिल्ली के साकेत कोर्ट ट्रांसफर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पीड़ित लड़कियों को मु’जावजा देने तथा उनकी चिकित्सा व शिक्षा तथा आर्थिक मदद करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मा’मले की सु’नवाई साकेत कोर्ट में 23 फरवरी 2019 से चल रही थी। कोर्ट में पी’ड़िताों ने अपनी रों’गटे खड़े कर देने वाली ‘दास्तान बताई थी। सुनवाई के बाद सितंबर 2019 में कोर्ट ने सु”नवाई करके अपना फै’सला सुरक्षित रख लिया था।
ये हैं इस मा”मले के आ”रोपित
इस मा”मले का मुख्य आरो”पित ब्रजेश ठाकुर है। ब्रजेश सहित सभी आ”रोपित ये हैं-
– ब्रजेश ठाकुर (मुख्य आ’रोपित)
– साइस्ता परवीन उर्फ मधु
– इंदु कुमारी
– मीनू देवी
– नेहा कुमारी
– हेमा मसीह
– चंदा देवी
– रोजी रानी
– मंजू देवी
– किरण कुमारी
– विकास कुमार
– गुड्डू कुमार पटेल
– दिलीप कुमार वर्मा
– रवि कुमार रोशन
– विजय कुमार तिवारी
– किशन राम उर्फ कृष्णा
– डॉ. अश्विनी उर्फ आसमानी
– विक्की
– रामानुज ठाकुर
– रामाशंकर सिंह




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