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मुजफ्फरपुर में नहीं मिल रहे खरीदार, सब्जी की लागत निकालना भी मुश्किल

मुजफ्फरपुर। जिले के मीनापुर, सकरा, बोचहां, मुशहरी, कुढ़नी समेत कई प्रखंडों में टमाटर की व्यापक खेती होती है। मीनापुर के गंजबाजार, नेउरा बाजार एवं खेमाई पट्टी बाजार में इन दिनों टमाटर का कोई खरीदार नहीं है। कभी यहां टमाटर की खरीदारी के लिए राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल, असम व नेपाल तक के व्यापारी पहुंचते थे। कोरोना काल में बाहर से व्यापारियों के नहीं आने से किसानों को अपनी पैदावार की उचित कीमत नहीं मिल पा रही है। मीनापुर के अली नेउरा के किसान चंदेश्वर प्रसाद, लालबाबू प्रसाद, सीताराम प्रसाद बताते हैं कि टमाटर की इस बार अच्छी फसल होने से बेहतर आमदनी की उम्मीद थी। स्थानीय व्यापारी 25 किलो (एक ट्रे) टमाटर 20 से 40 रुपये में ले रहे हैं। चंदेश्वर सिंह का कहना है कि यहां प्रतिवर्ष बाहर के व्यापारी अच्छी कीमत देकर जाते थे। 10 दिन पहले तक एक ट्रे टमाटर 250 रुपये में बिक रहा था। कोरोना के बढ़ते प्रकोप और लॉकडाउन के बाद भाव औंधे मुंह है। मुकेश कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से बाजार तक सब्जी पहुंचे यह व्यवस्था नहीं है। कटरा के किसान जितेंद्र सिंह, नंदू ठाकुर व इसराइल अहमद ने बताया कि परवल व नेनुआ की खेती कर रहे हैं। बाहर के व्यापारी लॉकडाउन के कारण नहीं पहुंच रहे हैं।

सहायक निदेशक, उद्यान उपेंद्र कुमार

ने कहा कि 10 से 15 टन भंडारण क्षमता वाले प्री कूलिग कोल्ड स्टोरेज लगाने की योजना है। इधर किसी किसान का आवेदन नहीं आया है। आवेदन आने पर अविलंब उसको उपलब्ध कराया जाएगा। वह इसके के लिए किसानों को जागरूक कर रहे हैं। राम प्रकाश सहनी, सुंयुक्त कृषि निदेशक तिरहुत प्रमंडल ने कहा कि टमाटर पर ट्रैक्टर चलाने की जानकारी मिली है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। किसानों के लिए प्री कूलिग कोल्ड स्टोरेज के लिए योजना चल रही है। उसकी समीक्षा कर कोशिश होगी कि हर प्रखंड में वह लग जाए।

जमीन पर नहीं उतर सकी प्री कूलिंग कोल्ड स्टोरेज की योजना : राष्ट्रीय बागवानी मिशन की ओर से मुजफ्फरपुर में प्री कूलिंग कोल्ड स्टोरेज लगाने की योजना जमीन पर नहीं उतर सकी। आवेदन देने के बावजूद किसानों को यूनिट उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसका नतीजा है कि वे टमाटर, नेनुआ, बैंगन आदि शीघ्र खराब होने वाली सब्जियों को फेंकने पर विवश हो रहे हैं। तीन दिन पहले मीनापुर इलाके में ऐसा ही हुआ है। प्रखंडों में किसानों के पास सब्जियों को सुरक्षित रखने का कोई संसाधन नहीं है। मीनापुर के किसान बच्चन सहनी, भोला राय ने बताया कि लॉकडाउन के कारण बाहर के व्यापारी नहीं आ रहे। अचानक कीमत कम हो गई है। इसके कारण किसान टमाटर को फेंकने पर मजबूर हैं। मुजफ्फरपुर फल एवं सब्जी स्वावलंबी समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा ने बताया कि करीब तीन साल पहले सब्जी उत्पादकों के लिए 10 से 15 टन भंडारण क्षमता वाले प्री कूलिंग कोल्ड स्टोरेज की योजना आई। इसका उद्देश्य निजी कोल्ड स्टोरेज मालिकों की मनमानी पर अंकुश के अलावा ग्रामीण इलाकों के किसानों को सुविधा देना था। 13 लाख की लागत में आधा सरकार की ओर से अनुदान मिलना था। ग्रामीण इलाकों में संचालन को आसान और सहज करने के लिए इसे बिजली, जेनरेटर के साथ सौर उर्जा से भी जोड़ा गया। उन्होंने खुद दो साल पहले यूनिट के लिए आवेदन दिया था, लेकिन विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई।

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