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मुजफ्फरपुर : 61 केंद्र पर 5839 लोगों को दी गई कोरोना वैक्सीन

मुजफ्फरपुर : शनिवार को 61 केंद्र पर 5839 को वैक्सीन दी गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 8020 लोगों को टीका देने का लक्ष्य निर्धारित था। फ्रंटलाइन वर्कर्स ने 381 पहला डोज लिया। दूसरा डोज 12 लोगों ने लिया। जबकि हेल्थ वर्कर्स ने पहला डोज 61 व दूसरा डोज 28 ने लिया। 18 साल वाले 3948 ने टीका लिया। वहीं, 45 से 59 साल वाले 510 ने पहला डोज व 349 ने दूसरा डोज लिया। 60 साल वाले 221 बुजुर्ग ने पहला व 347 ने दूसरा डोज लिया। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ.एके पांडेय ने बताया कि हर केंद्र पर समय पर टीका पहुंचाया गया।

मानवाधिकार अधिवक्ता ने ई-मेल से भेजी शिकायत, आरोपितों को बचाने का आरोप

कोरोना जांच के लिए आईं सरकारी एंटीजन किटों को कालाबाजारी का मामला देश के शीर्ष न्यायालय में पहुंच गया है। इसके साथ ही जिला स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी मुख्य आरोपित सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रवीण कुमार व सरैया के लैब टेक्नीशियन अमितेष कुमार को बचाने में जुटे हैं। मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के मुख्य न्यायाधीश, हाईकोर्ट पटना के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग एवं बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा है। आरोप लगाया कि पिछले दिनों एक मरीज ने सदर अस्पताल के जांच केंद्र पर लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हुए तड़पकर दम तोड़ दिया था। वहीं दूसरी ओर एंटीजन किट की कालाबाजारी हो रही है।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इस मामले के आरोपित सदर अस्पताल के प्रबंधक की गिरफ्तारी नहीं हो रही। इससे साफ जाहिर है अगर वह पकड़ में आया तो कई चेहरे बेनकाब होंगे। नामजद आरोपित होने के बाद भी वह सदर अस्पताल में रहकर फर्जीवाड़ा के कागज दुरुस्त करने में जुटा है। पुलिस के काम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हस्तक्षेप कर रहे हैं।

कोर्ट के बदले खुद ट्रायल कर बता रहे निर्दोष

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सकरा के प्रशिक्षु डीएसपी ने सात लोग को आरोपित बनाया है। चोरी के सामान को जब्त किया गया है। अब इसके बाद कोर्ट फैसला करेगा कि कौन सही और कौन गलत है। जो जानकारी आ रही उसके हिसाब से इस मामले में संरक्षण देने वाले अधिकारी खुद जज बनकर प्रबंधक को बचाने में जुट गए हैं। अगर ऐसा नहीं है तो चार-पांच दिन बीतने के बाद भी विभागीय कार्रवाई शून्य क्यो है?

अधिवक्ता ने बताया कि शहर में कोरोना मरीज उचित इलाज व संसाधन के अभाव में दम तोड़ने को मजबूर हैं। जिन्हें इलाज की जिम्मेदारी दी गई है उसमें से ही कुछ लोग कालाबाजारी के धंधे से जुड़कर मानवता को शर्मसार करने में लगे हैं। ये मानवाधिकार का उल्लंघन है। पुलिस द्वारा 4000 से अधिक सरकारी एंटीजन जांच किटों के अलावा बड़े पैमाने पर पीपीई किट, नेबुलाइजर, सैनिटाइजर, हैंड ग्लब्स आदि सामान जब्त किया गया है। अधिवक्ता ने कहा कि इधर कोरोना को लेकर हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में रोज सुनवाई चल रही है। इसलिए उन्होंने शीर्ष कोर्ट को इसकी जानकारी दी है। उम्मीद है कि इस पूरे मामले में जो भी आरोपित का बचाव करेंगे उनको कोर्ट संज्ञान लेकर सजा देगा।

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