अक्षय तृतीया के दिन सबसे ज्यादा शादियां होती हैं. लेकिन दो साल से सब कुछ बदल गया है. बहुत लोगों ने शादियां टाल दी हैं. जो कर रहे हैं, उनके लिए नियम बहुत हैं. इसका सबसे बड़ा असर शादी समारोहों से जुड़े लोगों पर हो रहा है. बैंड बाजा कारोबार का तो मानो बैंड ही बज चुका है. ऐसे में बैंडबाजे वालों और घोड़ी वालों का कारोबार ठप हो गया है. सुरेश बैंड घोड़ी वाला के मालिक सुरेश कुमार काम धंधा न होने से आहत हैं.
वह कहते हैं कि स्थिति बहुत खराब चल रही है. घर का खर्चा चलाने के लिए मजबूरी में अपनी दो घोड़ी औने-पौने दाम में बेचनी पड़ गई. प्रदेश के वैशाली जिले में बारात की शोभा बढ़ाने वाले बैंड संचालकों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है. लॉकडाउन के कारण मुश्किल में पड़े बैंड पार्टी संचालकों ने बैठक कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि लॉकडाउन के कारण बैंड पार्टी में काम करने वाले कलाकार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं.

लॉकडाउन में शादी समारोह आयोजन की अनुमति दी गई लेकिन बैंड पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया. सरकार आदेश देती तो यह बैंड संचालक और कलाकार भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने कारोबार को जीवित रख पाते. लॉकडाउन की वजह से पहले से जो बुकिंग हुई थी, लोगों ने कैंसिल करा दिया. एडवांस भी लौटाना पड़ा



Leave a Reply