घाटशिला. कहा जाता है कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं. इस कहावत का उद्देश्य है कि लक्षणों को समझ लिया जाए तो बच्चे की प्रतिभा को निखारकर उसके भविष्य को संवारा जा सकता है. यह कहावत घाटशिला के प्रखंड में चरितार्थ होती दिख रही है, जहां 11 साल के एक लड़के राज धीवर ने अपनी प्रतिभा से सबको चौंका दिया है. बगैर किसी ट्रेनिंग के अपनी कुदरती प्रतिभा से इस बालक ने इलेक्ट्रॉनिक्स के जानकारों को भी हैरत में डाल दिया है.
आमाईनगर में रहने वाले राज ने एक मल्टीपरपज़ यंत्र बनाया है, जिसे हेडफोन के साथ ही एफएफ रेडियो, टॉर्च और छोटे पोर्टेबल पंखे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. कमाल या आश्चर्य की बात यह है कि केशव धीवर के 11 वर्षीय बेटे ने यह काम एक तो कचरे से किया है और दूसरे बगैर किसी ट्रेनिंग के.
कैसे बनाया राज ने हेडफोन?
कहा जाता है कि अनुकरण ही सीखने का पहला तरीका होता है. राज भी इसी तरह की बात बताता है कि उसने कुछ लोगों को कान पर एक यंत्र लगाकर गाने, न्यूज़ आदि सुनते देखा था, तो उसके मन में यह बात आई कि इस तरह का उपकरण वह भी बनाए. लेकिन सिर्फ सुनने के ही नहीं, बल्कि और कामों में इस्तेमाल हो सके, ऐसा कोई उपकरण बनाने की उसने ठानी.

ई वेस्ट से 11 साल के बच्चे ने बनाया मल्टीपरपज़ हेडफोन.
अब सोच तो थी, लेकिन साधन या संसाधन नहीं थे. एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले राज ने आसपास मिलने वाले इलेक्ट्रॉनिक कचरे को इकट्ठा किया और अपनी सोच समझ से ही यह यंत्र बना लिया. इसमें तारों को बगैर सोल्डिंग के ही जोड़ा गया है, लेकिन हेडफोन जैसा यह यंत्र राज की कल्पना के अनुरूप कारगर है. इसके ज़रिये न केवल गाने सुने जा सकते हैं बल्कि ब्लूटूथ सिस्टम वाला भी है.
राज के हुनर को सैल्यूट क्यों?
केशव धीवर मछली पकड़कर अपने घर का खर्च चलाते हैं. लॉकडाउन में बाज़ार मंदा रहा तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूल में सातवीं के छात्र राज की स्कूली पढ़ाई भी रुक गई. लेकिन इस समय का सदुपयोग करते हुए राज ने कमाल का उपकरण बना दिया. दावा है कि 200 मीटर की दूरी तक फोन रखकर ब्लूटूथ रेंज से इस हेडफोन को चलाया जा सकता है.
राज पढ़ने के बजाय इसी तरह का काम करता रहता है. फेंके गये सामानों को घर लाकर दिन भर कुछ न कुछ बनाते रहना उसकी आदत रही है. घर की माली हालत खराब है, लेकिन अगर वो पढ़ लिख जाए तो ज़रूर कुछ कर सकता है, कुछ बन सकता है.
— केशव धीवर, राज के पिता
अब लॉकडाउन में अपने ही बनाये ब्लूटूथ हेडफोन से राज ही गाने नहीं सुनता, बल्कि उसके भाई और आस पास के लोग भी इस उपकरण का इस्तेमाल कर आनंद ले रहे हैं. राज के भाई मनसा का कहना है कि कचरे से सामान बीनने पर पहले वो राज पर गुस्सा करता था, लेकिन उसके भाई ने जब कचरे से ब्लूटूथ हेडफोन बना डाला, तो उसकी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा.
परिवार ही नहीं, बल्कि गांव के लोग भी इस छोटे बच्चे के कद्रदान बन चुके हैं. आसपास के लोगों का कहना है कि विलक्षण प्रतिभा वाले इस बालक को सिस्टम से सही मदद और मार्गदर्शन मिले तो आगे चलकर वह गांव, राज्य और देश तक का नाम रोशन कर सकता है.





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