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पटना के मीठापुर बस स्टैंड से रिपोर्ट:प्राइवेट बस अब सीतामढ़ी-सीवान का भाड़ा 220 की जगह 500 ले रहे, रांची का किराया 1000 तक पहुंचा

शनिवार को भास्कर टीम पटना के मीठापुर बस स्टैंड पहुंची थी। उस वक्त दोपहर के 12 बजकर 10 मिनट का था। सिकंदराबाद से एक स्पेशल ट्रेन दानापुर आई थी। उस ट्रेन के काफी सारे पैसेंजर्स ऑटो से मीठापुर बस स्टैंड पहुंचे। इनमें कुछ लोगों को सुपौल जाना था तो कुछ को सीतामढ़ी। इसी तरह अलग-अलग जगह जाने वाले कई और पैसेंजर्स थे। कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा और उपर से लॉकडाउन, इस वजह से सभी के चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी। लंबी दूरी तय कर यह पटना पहुंचे थे।

प्राइवेट बस वाले एक सीट की जगह दो सीट से भी अधिक का भाड़ा ले रहे हैं।

प्राइवेट बस वाले एक सीट की जगह दो सीट से भी अधिक का भाड़ा ले रहे हैं।

पटना से सीतामढ़ी का किराया 500 रुपए मांगा

परिवार के साथ आए रामजनम के होश उस वक्त उड़ गए जब बस का भाड़ा सुना। आम दिनों में पटना से सीतामढ़ी का किराया 220 रुपया होता है। लेकिन, वर्तमान में एक पैसेंजर से 500 रुपए वसूल किए जा रहे हैं। सीधे 280 रुपया अधिक। एक सीट की जगह दो सीट से भी अधिक का भाड़ा ले रहे हैं। प्राइवेट बस वाले आम आदमी की जेब पूरी तरह से ढ़ीली कर दे रहे हैं। यह तब हो रहा है, जब से बिहार सरकार ने 50 प्रतिशत पैसेंजर्स को बसों में बैठाने का आदेश दिया। इस बात का प्राइवेट बस वाले नाजायज फायदा उठाने लगे।

पटना से रांची का 800 से 1000 तक वसूल रहे

यह हाल पटना से चलने वाली सभी रूट की प्राइवेट बसों का है। जब इस बारे में टिकट के बुकर से बात करने की कोशिश की गई तो एक ने कैमरे के सामने बोलने से कुछ भी मना कर दिया। बुकर के अनुसार पटना से दरभंगा का किराया आम दिनों में 200 रुपए था, अभी 500 ले रहे हैं। इसी तरह सीवान और गोपालगंज के लिए 250 की जगह 500 और पटना से रांची के लिए 450 की जगह 800 से 1000 तक वसूले जा रहे हैं।

टिकट बुकिंग करने वालों का तर्क है- एक तो पैसेंजर कम। उपर से 50 प्रतिशत बैठाने का सरकारी आदेश। ऐसे में डीजल और बाकी खर्चे कहां से उठाएंगे?

टिकट बुकिंग करने वालों का तर्क है- एक तो पैसेंजर कम। उपर से 50 प्रतिशत बैठाने का सरकारी आदेश। ऐसे में डीजल और बाकी खर्चे कहां से उठाएंगे?

पटना से बनारस के लिए रात में 5 बसें चलती हैं। किराया 520 रुपया एक पैसेंजर का है। लेकिन, इनसे भी 2 सीट का किराया लिया जा रहा। दूसरे बुकर संजय सिंह के अनुसार, एक तो पटना से जाने में पैसेंजर कम है। उपर से 50 प्रतिशत बैठाने का सरकारी आदेश है। ऐसे में बस वाले डीजल और बाकी खर्चे कहां से उठाएंगे?

भास्कर टीम को रूदल नाम के एक अलग बुकर मिले जो अररिया, पूर्णिया और किशनगंज जाने वाली बसों के लिए टिकट बुक करते हैं। इनकी मानें तो लॉकडाउन की वजह से इन रूटों पर आधी से ज्यादा बसें चलनी बंद हो गई हैं। पैसेंजर्स भी कम हैं। पहले एक बस में 50 पैसेंजर बैठाते थे। कोरोना की वजह से भी 20 से 25 पैसेंजर्स ही बैठा रहे हैं। इसलिए किराया दो सीट का वसूल रहे हैं।

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