न डॉक्टर मिल रहे, न ही साधन। लॉकडाउन में जब किसी की तबीयत बिगड़ रही है तो सूझ नहीं रहा कि क्या करें। खासकर बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर तो दादी-मां की हालत बुरी हो जाती है- कलेजे के टुकड़े को लेकर कहां जाएं, किससे दिखाएं। अधिकतर निजी क्लीनिक बंद हैं और सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की भीड़। गुरुवार को शहर के अखाड़ाघाट इलाके की एक बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर दादी और मां उसे गोद में लेकर घर से पैदल ही निकल पड़ीं।
लॉकडाउन में कोई साधन मिलने से रहा। कहा- कुछ आगे बढ़ने पर यह रिक्शा मिला है। लेकिन, परेशानी यह है कि दो डॉक्टर की क्लीनिक बंद रहने के कारण निराश लौटना पड़ा है। साथ ही रास्ते में हर चौराहे पर पुलिस को जवाब देना पड़ रहा। अब सदर अस्पताल का ही आसरा है। वहां पर डॉक्टर तो होंगे ही। बड़ी मुश्किल है, कोरोना के इस समय में। लोग इलाज कराएं कि संक्रमण से बचें।





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