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पर्यावरण के प्रति वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय की अनूठी पहल / सभी कर्मचारी-अधिकारी साइकिल से पहुंच रहे विश्वविद्यालय

वर्धा। ऑक्सीजन किल्लत, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के खतरे के बीच वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय ने अनूठी पहल की है। अब इस विश्वविद्यालय के सभी अध्यापक, अधिकारी व कर्मचारी कार-बाइक के बजाये साइकिल से दफ्तर पहुंच रहे हैं। वर्धा स्थि‍त महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में प्रदूषण रहित इलेक्ट्रिक 122 साइकिलें खरीदी गई हैं। ‘प्रदूषण मुक्त हो परिसर’ की संकल्पना को साकार करने की कोशिश की गई है।

विशविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने परिसर को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शिक्षकों व
अधिकारियों को बैटरी चालित साइकिलें सौंपी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि साइकिल सवारी न सिर्फ शारीरिक श्रम की दृष्टि से लाभदायक है बल्कि
प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी व शोधार्थी भी साइकिल की सवारी करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

कुलसचिव क़ादर नवाज़ खान ने बताया कि विश्वविद्यालय ने पेट्रोल व डीजल से चलने वाली गाड़ियों के प्रदूषण को कम करने के साथ सामूहिक परिवहन से संक्रमण के खतरे को भी टाला है। साइकिलों की सुलभ चार्जिंग के लिए विश्वविद्यालय परिसर में ही 20 चार्जिंग प्वाइंट भी लगाए जा रहे
हैं।

‘गांव का पानी गांव में’, ‘खेत का पानी खेत में’, ‘घर का पानी घर में’ की तर्ज पर ‘परिसर का पानी परिसर में’ की अवधारणा को साकार करते हुए विश्वविद्यालय वर्षा जल संरक्षण के लिए आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। जिला प्रशासन के सहयोग से बहने वाले पानी का उपयोग
विश्‍वविद्यालय परिसर में पेड़-पौधे की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। 212 एकड़ के परिसर के ग्रीन जोन आरक्षित जगहों में हजारों पेड़-पौधे

लगाकर हरियाली लाई जा रही है। परिसर के आसपास पक्षियों के लिए प्याऊ लगवाए गए हैं। विश्वविद्यालय ने कोरोना काल के दौरान गांवों की स्थिति, स्वास्‍थ्‍य आदि पर एक दल भेज कर परियोजना के तौर पर सर्वे के माध्यम से 400 पेज की रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार और भारत सरकार को भी सौंपी है।

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