नई दिल्ली ।
भारत में कोरोना महामा’री की दूसरी लहर बेकाबू हो चुकी है, पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर बद से बदतर होती जा रही है। पूरे देश में संक्रमण ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया है। हर रोज साढ़े तीन लाख से ज्यादा मरीज संक्रमित मिल रहे हैं, हालात को देखते हुए राज्यों में पूर्ण बंदी या आंशिक लॉकडाउन लागू है। लेकिन लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू समेत सख्त पाबंदी से देश की आर्थिक गतिविधियां कमजोर होती जा रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर नज़र रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने दावा किया है कि लॉकडाउन की वजह से 72.50 लाख से अधिक लोग बेरोजगार हो गए हैं। इसकी वजह से फिर रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की निगरानी के लिए केंद्र के उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वेक्षण (सीएमआईई-सीपीएचएस) के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल-मई 2020 में भारत में लगाए गए लॉकडाउन काफी सख्ती से लागू किए गए थे। दुनिया के किसी देशों ने इतनी सख्ती से लॉकडाउन नहीं लगाया था। इस दौरान 100 मिलियन श्रमिकों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा था।





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