एसकेएमसीएच में कोरोना मरीजों की माै’त का आंकड़ा इतना बढ़ रहा है कि हर दिन औसत 6 माै’त हाे रही हैं। लेकिन, सच यह भी है कि अब तक मृ’त राे’गियाें काे जीवनकाल में इलाज के लिए वेंटिलेटर पर नहीं रखा गया। हालांकि, उनकी माै’त अति गंभी’र स्थिति होने पर हुई। एसकेएमसीएच की रोजाना हेल्थ बुलेटिन में भी यह जानकारी दी जा रही है कि अब तक जिन मरीजों का इलाज हुआ या जिनकी मौ’त हुई, उनमें किसी काे भी वेंटिलेटर पर नहीं रखा गया। दरअसल एसकेएमसीएच के काेराेना वार्ड में उपलब्ध 14 में वेंटिलेटर में से 10 खराब पड़े हैं। चार का इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा है।
अब लगातार हेल्थ बुलेटिन की मॉनीटरिंग के बाद डीएम प्रणव कुमार ने इस पर नाराजगी जताई है। अधीक्षक से स्पष्टीकरण पूछा है। कहा है कि आखिर औसतन 6 मरीजों की राेज मौत के बाद भी किस परिस्थिति में एक भी वेंटिलेटर पर नहीं रखा गया? डीएम ने इस काेराेना एसओपी का उल्लंघन माना है। कहा है कि अति गंभीर स्थिति में मरीज को वेंटिलेटर पर रखना अनिवार्य है। डीएम के शो कॉज के बाद एसकेएमसीएच में मरीजों के परिजन के मन में इलाज में लापरवाही से मौत होने की आशंका घर करने लगी है। तीन दिन पहले मरे 19 साल के प्रकाश के भाई विकास कुमार ने आरोप लगाया- उनका भाई वेंटिलेटर पर रखने की गुहार लगाता रहा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और वह म’र गया।








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