बेला स्थित ऑक्सीजन प्लांट से 884 बड़े और 94 छोटे सिलेंडर का उत्पादन हुआ। इनकी विभिन्न अस्पतालों में आपूर्ति की गई। आइटी मेमोरियल के प्रबंधक ने ऑक्सीजन की कमी से नए मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया। वही मां जानकी अस्पताल में भी इसका हवाला देकर नए मरीजों को भर्ती करने से इन्कार कर दिया गया। वैशाली कोविड केयर सेंटर व अशोका अस्पताल प्रबंधन भी नए मरीजों को भर्ती करने से परहेज कर रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ.एसके चौधरी ने कहा कि ऑक्सीजन पर निगरानी के लिए हर स्तर पर पहल चल रही है। कितना उत्पादन हुआ उसके हिसाब से सबको आपूर्ति की जा रही है।
इन अस्पतालों को दी गई ऑक्सीजन
-एसकेएमसीएच में 145 बड़े व 15 छोटे, प्रसाद हॉस्पिटल में 27 बड़े व दो छोटे, अशोका हॉस्पिटल 78 बड़े व दो छोटे, वैशाली कोविड केयर सेंटर में 70 बड़े, आइटी मेमोरियल में 30 बड़े, डीएमसीएच दरभंगा में 95 बड़े, मेडिकल कॉलेज मधेपुरा 90 बड़े, बुद्धाश्री हॉस्पिटल में 16 बड़े, एसआरजी में छह बड़े, विनायका हॉस्पिटल में सात बड़े, शिवम गैस एजेंसी में 76 बड़े व 15 छोटे, बिहार एयर गैस सिवान में 33 बड़े, आरबीएम मुजफ्फरपुर में सात बड़े, ड्राइस हॉस्पिटल में दो बड़े, यूनाइटेड गैस मोतिहारी में 66 बड़े, श्रीबालाजी मधुबनी में 55 बड़े, मुजफ्फरपुर हार्ट हॉस्पिटल में सात बड़े, मेडिका हॉस्पिटल में छह बड़े, नारायणी हॉस्पिटल दो बड़े व छह छोटे, आरडीजेएच हॉस्पिटल तुर्की दो बड़े व 54 छोटे, नोबल हॉस्पिटल में 10 बड़े व एक छोटा, पीएससी गायघाट में छब बड़े, श्रीराम इमेङ्क्षजग चाइल्ड हॉस्पिटल में एक बड़ा, डॉ.आरपी द्विवेदी में एक छोटा, वैशाली रिपब्लिक हॉस्पिटल में 30 बड़े और मोहन गैस महुआ को 16 बड़े सिलेंडर दिए गए।





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