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सुशासन का हाल : पुलिसवालों का ही फोन नहीं उठा रहे हैं बिहार के DGP, आम लोगों के साथ क्या होता होगा सलूक

PATNA : किसी राज्य की पुलिस का मुखिया अगर अपने मातहत काम करने वाले पुलिसकर्मियों का ही फोन रिसीव करना बंद कर दे तो आम आदमी के साथ क्या सलूक होता होगा? बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने कोरोना के भीषण कहर के बीच पुलिसकर्मियों की भी फरियाद सुनना बंद कर दिया है. पुलिस एसोसिएशन पूछ रहा है कि हम किसके पास अपनी फरियाद लेकर जायें.











बिहार पुलिस एसोसिएशन ने खोला राज
बिहार के डीजीपी का ये हाल हम नहीं बता रहे हैं बल्कि खुद पुलिसकर्मी बता रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के संगठन बिहार पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा है कि ये बड़ी अजीब स्थिति है कि कई बार फोन लगाने पर भी डीजीपी फोन नहीं उठा रहे हैं. मृत्युजंय कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में बडे पैमाने पर पुलिसकर्मी कोरोना के शिकार बन रहे हैं. कम से कम तीन इंस्पेक्टर औऱ सब इंस्पेक्टर कोरोना के कारण मर चुके हैं. सैकडों पुलिसकर्मी बीमार हैं. पुलिसकर्मी अपनी पीड़ा डीजीपी को बताना चाहते हैं लेकिन डीजीपी फोन ही नहीं उठा रहे हैं.









व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर बतायी पीड़ा
बिहार पुलिस एसोसिएशन ने अब डीजीपी को व्हाट्सएप मैसेज भेजकर अपनी पीड़ा सुनायी है. एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि जब कोई रास्ता नहीं बचा तो उन्होंने व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा है. अपने मैसेज में उन्होंने लिखा है कि कोरोना योद्धा पुलिसकर्मी और उनके परिजनों पर कोरोना कहर बरप रहा है. लेकिन उन्हें इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है. लिहाजा उन्हें इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है. ऐसे में आपसे आग्रह है कि पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों के इलाज के लिए हॉस्पिटलों में कुछ बेड उपलब्ध कराया जाये.

तीन पुलिस अधिकारी की मौत हुए
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने डीजीपी को मैसेज भेजा है कि आप बिहार के पुलिस प्रमुख हैं और सभी पुलिसकर्मियों के अभिभावक हैं. ऐसे में आपका कर्तव्य है कि इस संकट में पुलिस परिवार के सदस्यों के दुख को कम करें. कल मोतिहारी के दारोगा त्रिलोकि नाथ राय, विशेष शाखा के इंस्पेक्टर जयदेव भगत की अचानक मौत हो गई. आज सुबह 9:39 बजे आक्सीजन की कमी से किऊल जीआरपी इंस्पेक्टर राज किशोर प्रसाद की मृत्यु हो गई. इनके अलावा अन्य पुलिसकर्मी भी संक्रमित हैं.

खुद नहीं फोन रिसीव कर सकते तो किसी औऱ को रख लीजिये
मृत्युंजय सिंह ने कहा है कि अगर डीजीपी खुद फोन नहीं रिसीव कर सकते तो पुलिसकर्मियों की पीड़ा सुनने के लिए कम से कम किसी औऱ अधिकारी तो बहाल कर लें. पुलिस मुख्यालय में किसी अधिकारी को बीमार पुलिसकर्मियों के इलाज की व्यवस्था के लिए तत्काल मोबाइल नम्बर के साथ प्रतिनियुक्त किया जाए ताकि बीमार पुलिसकर्मीयों के इलाज के लिए व्यवस्था होती रहे.

फोन को लेकर हमेशा विवादों में रहे डीजीपी
हम याद दिला दें कि बिहार के डीजीपी एस के सिंघल फोन नहीं उठाने के कारण हमेशा विवादों में रहे हैं. कई बड़े आपराधिक वारदातों के समय भी डीजीपी पत्रकारों तक का फोन नहीं उठाते रहे हैं. ऐसे में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ये जानकारी दी थी. नीतीश कुमार ने सैकडों लोगों के बीच डीजीपी को ये कहा था कि वे फोन उठाया करें. लेकिन अब पुलिसकर्मी भी कह रहे हैं कि डीजीपी साहब फोन नहीं उठाते.

Input: FirstBihar

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