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बुधवार के दिन करें ये उपाय, तेज होगा दिमाग और त्वचा रो’गों से मिलेगी मुक्ति

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, बुधवार के स्वामी बुध देव हैं। इसलिए इस दिन बुध ग्रह को प्रसन्न करने के उपाय किए जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, गणित, वाणिज्य, बैंकिंग, त्वचा और वाणी का कारक माना जाता है। इनका सीधा सम्बन्ध हमारी बुद्धि और तर्कशक्ति से है। जिन लोगों की कुंडली में बुध मजबूत स्थिति में होते हैं, वे काफी समझदार, तर्क-वितर्क में कुशल और अपनी बातों को बेहतर तरीके से रखने वाले होते हैं। वहीं जिनकी कुंडली में बुध देव क’मजोर होते हैं, उन्हें अक्सर तमाम समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसे जातकों में स्वास्थ्य संबंधी, कमजोर दिमाग और वाणी संबंधी दोष पाया गया है। आइए जानते हैं बुध देव को मजबूत बनाने के लिए बुधवार के दिन कौनसे उपाय करने चाहिए।

बुध देव को मजबूत बनाने के लिए बुधवार के दिन करें ये उपाय

  • बुधवार के दिन किन्नरों को हरे रंग के वस्त्र का दान भी बुध के शुभ प्रभाव को बढ़ाता है। हर रंग और किन्नर दोनों ही बुध ग्रह से संबंधित है इसलिए ज्योतिषशास्त्र में किन्नरों को हरे रंग के वस्त्र देना शुभ फलदायी बताया गया है।
  • बुधवार को मूंग की दाल दान करने से कष्टों का निवारण होता है। किसी गरीब अथवा जरूरतमंद को मूंग दान करें और फिर देखें कि कैसे आपके सभी दुख दूर हो जाते हैं।
  • गाय को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है। बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाने से सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।
  • बुधदेव को प्रसन्न करने के लिए अपने खाने में से तीन भाग निकाल कर, उसमें से एक हिस्सा गाय को, दूसरा हिस्सा कौवे को और तीसरा हिस्सा कुत्ते को खिलाएं।
  • जिनकी कुंडली में बुध ग्रह दोष है वे खासकर इस दिन गणेश भगवान को मोदक का प्रसाद चढ़ाएं। इससे ग्रह के दोष खत्म हो जाएंगे।
  • बुधदेव की शुभता पाने के लिए महिलाएं बुधवार के हरे रंग की चूड़ियां पहनें और इलायची का सेवन करें।
  • कुंडली में बुध दोष को दूर करने के लिए प्रतिदिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं।

बुध ग्रह के मंत्रजपें बुध का मंत्र

यदि आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है या फिर नीच का हो तो आप बुध ग्रह की शुभता पाने के लिए बुध के बीज मंत्र का जाप करें — 
‘ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय् नम:।।
बुध मंत्र का जाप 14 बार किया जाता है।

बुध की साधना का मंत्र 
प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम।
सौम्यं सौम्य गुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्।।

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