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कोरोना के ख’तरे से बेपरवाह आस्था का जनसैलाब, क्या मंदिरों में नहीं फैलता कोविड सं’क्रमण?

NALANDA:चैत्र महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतलाष्टमी मनाई जाती है. इसी मौके पर बिहारशरीफ से तीन किलोमीटर दूर मघड़ा गांव में स्थापित विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ शीतला माता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया. इस आयोजन को लेकर लोगों में, खासकर महिलाओं में काफी उत्साह देखने को मिला. महिलाओं की लंबी कतारों से मंदिर पटा रहा. इस दौरान कहीं भी कोरोना को लेकर ड’र या चिंता दिखाई नहीं दी.

जिला प्रशासन ने शीतलाष्टमी को लेकर मंदिर के पास लगने वाले मेले पर तो पाबंदी लगी दी है, मगर इस दौरान मंदिर में लोगों की उमड़ती भीड़ को रोकने में नाकामयाब रही. मंदिर के आसपास पूजन सामग्री सहित अन्य दुकानों को नहीं खोलने का निर्देश दिया गया है. पुलिस लगातार ही लोगों से भीड़ कम लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील कर रही है, मगर लोगों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा.

शीतलाष्टमी को लेकर इस मंदिर में हर साल लाखों की भीड़ उमड़ती है. यहां मंदिर के पास एक तालाब है जिसमें पूजन से पहले नहाने की परंपरा है. ऐसी मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से लोग चेचक रोग से मुक्त हो जाते हैं. अतिप्राचीन काल से चैत्र कृष्ण पक्ष सप्तमी के दिन बसिऔड़ा मनाने की परंपरा चली आ रही है. अष्टमी के दिन किसी घर में चूल्हे नहीं जलेंगे. रात में बने खाने को लोग बसिऔड़ा के रूप में ग्रहण करेंगे. इस मौके पर पंडित ने बताया कि मघड़ा तथा इसके आसपास के गांवों में साल में चार बार बसिऔड़ा मनाया जाता है. पहला चैत्र कृष्ण पक्ष सप्तमी में, दूसरा वैशाख कृष्ण पक्ष सप्तमी में, तीसरा जेठ कृष्ण पक्ष सप्तमी और आषाढ़ महीने की कृष्ण पक्ष सप्तमी में चौथा बसिऔड़ा मनाया जाता है.

लोग भले ही मंदिरों में पूजा-पाठ कर रहे हों और सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन कर रहे हों, मगर कोरोना काल में इस तरह से भीड़ लगाना बिल्कुल भी सही नहीं है. मान्यताओं की वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है जिससे कई लोग एक साथ खतरे में पड़ जाएंगे. भले ही पुलिस-प्रशासन अपनी तरफ से सजग है, मगर कोरोना संक्रमण में लोगों को खुद ही सावधानी बरतनी होगी. 

Input: News4nation

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