गर्मी बढ़ने के साथ ही उत्तर बिहार के कई जिलों में जलस्तर नीचे जाने लगा है। तालाब सूख रहे हैं। नदियों में पानी कम हो गया है। इससे पेयजल की समस्या उत्पन्न होने लगी है। मुजफ्फरपुर में सकरा और मुरौल प्रखंड में जलस्तर 20 फीट से अधिक नीचे चला गया है। मुशहरी में जलस्तर 23 फीट नीचे चला गया है। शहरी क्षेत्र में स्थिति अधिक खराब है। इमलीचट्टी में जलस्तर 34 फीट तक नीचे चला गया है। बूढ़ी गंडक व सिकंदरपुर मन से सटे ब्रह्मपुरा, लक्ष्मी चौक व एमआइटी के आसपास का जलस्तर भी करीब-करीब इसी स्तर पर है। इन क्षेत्रों में सामान्य पंप जवाब देने लगे हैं। यहां विषम परिस्थिति से निपटने के लिए पीएचईडी ने नौ वाटर टैंकरों की व्यवस्था की है। इसके अलावा दो जलदूत भी काम करेंगे।
सीतामढ़ी के सोनबरसा प्रखंड से होकर गुजरने वाली अधवारा समूह की झीम, गोगा व सिंगयाही नदियों का जलस्तर कम हो गया है। इससे मकई, मूंग और सब्जियों की फसल बर्बाद होने के कगार पर है। सेंट्रल वाटर कमीशन सोनबरसा शाखा के गेज रीडर ललन सिंह ने बताया कि वर्तमान में झीम नदी का न्यूनतम जलस्तर 79.50 सेंटीमीटर पर स्थिर है।
15 लाख आबादी होगी प्रभावित
मधुबनी के शहरी क्षेत्र में जलस्तर 24-25 फीट और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 फीट तक पहुंच गया है। जिले में अधवारा समूह की धौंस, खिरोई, थुम्हानी, बछराजा व बुढऩद नदियों का जलस्तर कम हुआ है। इसमें और गिरावट आई तो करीब 15 लाख की आबादी प्रभावित होगी। समस्तीपुर के उजियारपुर एवं दलसिंहसराय में जलस्तर 22 फीट नीचे चला गया है। खानपुर प्रखंड में 21 और वारिसनगर, कल्याणपुर एवं समस्तीपुर प्रखंड में 20 फीट नीचे गया है। इस कारण इन इलाकों में पेयजल की समस्या उत्पन्न होने लगी है।
पश्चिम चंपारण में अभी स्थिति सामान्य है। कुछेक पहाड़ी नदियों में पानी अवश्य कम हुआ है। इनमें मसान, पंडई, सिकरहना, झकरी, मनोर, कांपन और हड़बोड़ा नदियां हैं। शिवहर में स्थिति सामान्य है।








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