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शाम में हं’गामा-मा’रपी’ट और रात को भोज का आनंद लेते दिखे NDA विधायक

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र (Bihar Assembly Session) के आखिरी दिन के पहले जो कुछ भी हुआ वह विधानसभा के इतिहास में एक काले दिन के तौर पर याद किया जाएगा. सदन में अमूमन सत्ताधारी दल और विरोधियों में तू-तू, मैं-मैं चलती रहती है, लेकिन बजट सत्र में बिहार सशस्त्र पुलिस बल विधेयक को पास कराने को लेकर जो कुछ भी हुआ उससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है. सदन के अंदर से लेकर बाहर तक खूब हंगामा हुआ और नौबत यहां तक आ गई की विरोधी पार्टी के विधायकों को सदन से बाहर करने के लिए पुलिस की मदद ली गई, जिसमें कई विधायकों को चो’टें भी आईं.

जब सदन से वि’रोधी पार्टी के विधायकों ने वाक आउट कर दिया तो सदन से विधेयक को पारित करवा लिया गया. विरोधी पार्टी के विधायक तो अपने-अपने घर चले गए, लेकिन सत्ताधारी दल के विधायक से लेकर मंत्री तक विधानसभा में ही रुक गए. दरअसल, इसके पीछे वजह यह थी कि बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने बजट सत्र खत्म होने की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रम वसंतोत्सव का आयोजन किया था, जिसमें सत्ताधारी दल के विधायकों और विरोधी पार्टी के विधायकों को भी बुलाया गया था.

सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद भोजन की भी व्यवस्था थी, लेकिन विरोधी पार्टी के तमाम विधायकों ने भोज का बहिष्कार कर दिया और सदन से चले गए. दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के विधायकों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का खूब लुत्फ़ उठाया और मनोरंजन किया. काफी देर तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का लुत्फ़ उठाने के बाद स्वादिष्ट भोजन का स्वाद चखने से सत्ताधारी दल के विधायकों के चेहरे पर ताज़गी आ गई. जब सत्ताधारी दल के विधायक संजय सरावगी से पूछा गया कि खाने का स्वाद कैसा लगा तो कहने लगे कि कार्यक्रम भी जबरदस्त था और भोजन भी लाजवाब. साथ ही उन्‍होंने यह भी कहा कि विरोधी पार्टी के विधायकों के इसमें शामिल न होने से थोड़ी निराशा हुई. उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टी के विधायकों को राजनीति करने से फुर्सत मिले तब न. वहीं इसी मामले में कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा ने कहा कि सदन के अंदर और बाहर जो कुछ भी हुआ इसके बाद भोज में शामिल होने का मतलब कहां था.

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