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सबसे ज्यादा वाशिंग मशीन और डिशवाशर खरीदने के लिए लिया जा रहा है लोन, जानिए लोन लेने की ऐसी ही रोचक वजहें

मुंबई. मुम्बई में 27 प्रतिशत लोगों ने अपना खुद का व्यापार शुरू करने के लिए पर्सनल लोन (Personal loan) लेना पसंद किया है. जबकि, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सबसे ज्यादा ऋण आवेदन (Loan Application) आए. मुंबई में 17 प्रतिशत लोन एप्लीकेशन दोपहिया या चैपहिया वाहन खरीदने व 15 प्रतिशत लैपटाॅप, टेबलेट जैसे इलेक्ट्रोनिक उपकरण खरीदने के लिए थे. इसकी वजह से घर (work from home ) या कहीं दूर से काम करना था.
“बॉरोअर पल्स रिपोर्ट बाए इंडियालैंड्स (Borrower Pulse Report by Indialands)“ में यह तथ्य सामने आए हैं. यह एक डिजिटल लैंडिंग प्लेटफार्म (Digital landing platform) है जो देश में लाॅकडाउन होने के समय से कर्ज लेने वालों के व्यवहार का अध्ययन कर रहा था. इस रिपोर्ट में टियर 1 और 2 शहरों में 25 मार्च 2020 से 20 मार्च 2021 के बीच का समय लिया गया है रिपोर्ट 21 से 55 वर्ष के डेढ लाख कर्ज लेने वाले लोगों के डाटा पर आधारित है.



नई पीढ़ी को अब कम खर्च वाली शादी करना और घूमना-फिरना पसंद
रोचक तथ्य यह है कि टियर 1 शहरों से जहां 46 प्रतिशत ऋण आवेदन आए हैं, वहीं टियर 2 शहरों से 54 प्रतिशत ऋण आवेदन प्राप्त हुए हैं. टियर 2 शहरों में सबसे ज्यादा ऋण आवेदन कोयम्बटूर, चंडीगढ़, लखनऊ, इंदौर और कोच्चि से आए हैं. सर्वे के अन्य प्रमुख निष्कर्षो में यह भी सामने आया कि विवाह और यात्रा के खर्च में कमी आई है. इससे यह पता चलता है कि नई पीढ़ी अब कम खर्च वाली शादी और बजट में आने वाला घूमना-फिरना पसंद कर रहे हैं.

दिल्ली में 31 प्रतिशत लोन एप्लीकेशन वाॅशिंग मशीन और डिशवाॅशर
दिल्ली में 31 प्रतिशत लोन एप्लीकेशन वाॅशिंग मशीन और डिशवाॅशर जैसी घरेलू उपयोग की चीजें खरीदने के लिए आए, वहीं 25 प्रतिशत ऋण आवेदन महामारी के कारण सामने आए स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए आए. बैंगलुरू में 28 प्रतिशत ऋण आवेदन इलेक्ट्रोनिक उपकरण खरीदने के लिए आए, वहीं 12 प्रतिशत ऋण आवेदन खुद की दक्षता बढ़ाने वाले कोर्स करने के लिए आए. इसका अर्थ यह है कि काफी लोगों ने खाली समय का उपयोग खुद की दक्षता बढ़ाने के लिए किया. चेन्नई में 19 प्रतिशत ऋण आवेदन दोपहिया या चैपहिया वाहन खरीदने के लिए आए, वहीं 17 प्रतिशत लोगों ने स्मार्ट टीवी, लैपटाॅप जैसे इलेक्ट्रोनिक उपकरण खरीदने के लिए ऋण मांगा. हैदराबाद में 20 प्रतिशत ने अपने चिकित्सा खर्चो को पूरा करने के लिए ऋण मांगा, वहीं 15 प्रतिशत ने अपनी दक्षता बढ़ाने वाले कोर्स करने के लिए ऋण मांगा.

पूरे देश में सबसे ज्यादा 25 प्रतिशत लोगों ने खुद के व्यापार के लिए पर्सनल लोन लिया
रिपोर्ट के मुताबिक, 25 प्रतिशत लोगों ने अपना खुद का व्यापार शुरू करने के लिए पर्सनल लोन लिया. वहीं, 18 प्रतिशत ने अपनी स्वास्थ्य सम्बन्धी जरूरतों को पूरा करने और 17 प्रतिशत ने दोपहिया या चैपहिया वाहन खरीदने के लिए ऋण लिया. इनमें से ज्यादातर ऋण कोविड-19 महामारी के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों की कारण लिए गए. टियर 2 शहरों से आने वाले ऋण आवेदनों में 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई. विलासिता पर होने वाले खर्चो मंे कमी के कारण प्रथम श्रेणी के शहरों से ऋण आवेदन कम हो गए.

महामारी से लोगों की उद्यमिता आई सामने
इंडियालैंड्स के फाउंडर और सीईओ गौरव चैपड़ा ने कहा कि कोविड-19 और इस वैश्विक महामारी के कारण बने आर्थिक संकट के हालात ने पिछले 12 महीनों को हमारे जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण समय बना दिया. आर्थिक मंदी, और नौकरियां जाने की वजह से पूरे देश में कई लोगों के लिए यह बडा झटका था. हालांकि इंडियालैंड्स बाॅरोअर प्लस रिपोर्ट बताती है कि नई पीढ़ी के लोगों ने अपने वित्तीय भविष्य को पूरी तरह से नियंत्रित करने की दिशा में बहुत मजबूती दिखाई. वैश्विक महामारी के दौरान इतनी बड़ी संख्या में अपना व्यापार शुरू करने की हिम्मत दिखाने से लोगों की उद्यमिता भी सामने आई और यह बहुत सकारात्मक स्थिति है. यह देखना भी सुखद रहा कि ज्यादातर ऋण आवेदन द्वितीय श्रेणी के शहरों से आए. इससे साफ पता चलता है कि अभी तक अछूते रहे इन बाजारों में काफी मांग है.

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