मुजफ्फरपुर. देश में सबसे ज्यादा शाही लीची की फसल पैदा करने वाले किसानों के सामने ब’र्बादी का ख’तरा मंड’रा रहा है. वजह है उनकी फसल पर लाल रंग के स्टीम बग कहलाने वाले की’टों ने बड़े पैमाने पर हम’ला बोल दिया है. फसल आने से पहले ही कीड़ों को देख कर किसानों और लीची का कारोबार करने वालों के होश उड़ गए हैं.
बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले का नाम आते ही मन में सबसे पहले लीची (Shahi Lychee) का ख्याल आता है क्योंकि शाही लीची उत्पादन इस इलाके की पहचान है, लेकिन शाही लीची के लिये हब के रूप में विकसित मोतिहारी जिले के मेहसी इलाके में लीची उत्पादन करने वाले किसानों के सामने अब बडा संकट खडा हो गया है. मेहसी और आसपास के क्षेत्रों में करीब 8 हजार हेक्टेयर में शाही लीची का उत्पादन होता है लेकिन लीची के पेड़ों में मंजर लगने के साथ ही डाली पर लाल रंग के कीड़े का बड़े पैमाने पर हमला हो गया है..
लीची तो दूर पेड़ के पत्ते भी बचना मु”श्किल
इन कीटों के ह’मले से ऐसा लग रहा है कि लीची खाना तो दूर की बात है, पेड़ पर लगे पत्ते भी बचना मु’श्किल है. जानकारी के मुताबिक ये कीड़े लीची लगने वाले डंठलों को अब तक 15 प्रतिशत तक चट कर चुके हैं. बिहार में मुजफ्फपुर के बाद मोतिहारी जिले के मेहसी में सबसे ज्यादा लीची का उत्पादन होता है, लेकिन पेड़ में स्टीम बग के हमले से लीची के फसल की ब’र्बादी की आशंका बढ गयी है. बहुत पेड़ों पर लीची के डंठलों में अभी तक दाना भी नहीं निकला है.. मेहसी और उसके आसपास सटे इलाके में तकरीबन 8 हजार हेक्टेयर में लीची का उत्पादन होता है, लेकिन यहां के किसान फसल ब’र्बादी का ख”तरा देख सिर पी’ट रहे हैं.
लाल रंग के कीड़े की वजह से किसान संकट में
लीची उत्पादन करने वाले किसानों के मुताबिक पिछले चार वर्षों से स्टीम बग नाम के लाल रंग के कीड़े की वजह से लीची के भरोसे जिने वाले किसान फिर से संकट में है. हर वर्ष लीची उत्पादन का क्षेत्र स्टीम बग के प्रकोप से उत्पादन सिमटता जा रहा है लेकिन बिहार सरकार के बागवानी मिशन और कृषि विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं किया जा रहा है. हैरानी की बात यह है कि हर वर्ष यहां के किसान पूंजी लगाकर लीची के लिये पेड़ और जड़ का एरिया को तैयार करते है लेकिन स्टीम बग किट के प्रभाव से किसान अपने अब बगीचे को काटने पर मजबूर हो रहे हैं.
देश में बिहार की लीची की 65 फीसदी हिस्सेदारी
जानकारी के मुताबिक देश के कुल लीची उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत से ज्यादा है. बिहार में कुल 34,200 हेक्टेयर भूमि पर लीची की खेती की जाती है और इस वर्ष बिहार में चार लाख टन लीची उत्पादन की संभावना है, लेकिन इन कीड़ों का ह’मला कहीं किसानों की आशा पर पानी न फेर दे इसका भय सभी को सता रहा है.








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