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बिहार में रातोंरात बढ़ी खेती लायक जमीन, सरकार को भी समझ में नहीं आ रहा कैसे हुआ ऐसा

बाढ़-सुखाड़ से प्रभावित फसलों की क्षतिपूर्ति की योजना को लेकर कृषि विभाग के सामने नई मुसीबत आ गई है। फसल सहायता योजना के तहत जितनी फसलों की बुआई नहीं हुई है, उससे ज्यादा रकबा के दावेदार आने लगे हैं। विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस अनियमितता का पर्दाफाश हुआ है। योजना के तहत किसानों को निबंधन के समय ही बताना होता है कि उन्होंने कितने रकबे में कौन-काैन सी फसलें लगाई हैं। मगर अधिकांश मामलों में किसान गलत जानकारी दे रहे हैं। अब सरकार पंचायतवार सत्यापन कराने जा रही है कि किसानों ने कौन सी फसल की बुआई कितने क्षेत्र में की है। गड़बड़ी सामने आने के बाद नए सिरे से आंकड़ा जिलों से तलब करने की तैयारी है।

पंचायत वार सत्‍यापन कराएगा कृषि विभाग

किसानों ने कौन सी फसल की बुआई कितने क्षेत्र में की कृषि विभाग पंचायतवार सत्यापन कराएगा। कृषि विभाग द्वारा चिह्नित  3251 पंचायतों के 643051 किसानों ने अर्जी दी है। शिकायतों के आधार पर विभागीय अधिकारियों का अनुमान है कि राज्य फसल सहायता योजना में निबंधित किसान सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। स्थिति यह है कि पंचायतों के जितने क्षेत्र में फसल की बुआई नहीं हुई है उससे अधिक रकबा में फसल क्षति के आवेदन आए हैं। कृषि विभाग ने निर्णय लिया कि निबंधित किसानों द्वारा फसल आच्छादन (बुआई) से  संबंधित आवेदित रकबा की शुद्धता की जांच के अधिसूचित फसलों की पंचायतवार आच्छादन रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

जितना खेत नहीं, उससे अधिक हो गई खेती

कृषि विभाग ने फसल सहायता योजना के क्रियान्वयन में पाया है कि कुछ ग्राम पंचायतों में निबंधित किसानों द्वारा आवेदित फसल बुआई क्षेत्र रकबा संबंधित पंचायत के कुल फसल बुआई क्षेत्र रकबा से काफी अधिक है।  यही नहीं, कई पंचायत में गैर रैयत किसानों ने अधिक निबंधन कराया है। यहां कुल फसल बुवाई क्षेत्र रकबा की तुलना में निबंधित किसानों द्वारा आवेदित फसल बुआई रकबा अधिक है।

2020- 2021 में फसल है अधिसूचित

सरकार ने रबी फसल 2020-2021 के तहत गेहूं, मक्का, चना, मसूर, अरहर, राई-सरसों, गन्ना, प्याज और आलू को बीमा योजना के तहत अधिसूचित कर रखा हैं।

सत्यापन में ग’ड़बड़ी पर कसेगा शि’कंजा

सरकार ने सत्यापन में गड़बड़ी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कृषि विभाग को शिकायत मिली है कि निबंधित किसानों का सत्यापन स्थानीय स्तर पर सही एवं निष्पक्ष रूप से नहीं किया जा रहा है। कुछ मामलों में पाया गया है कि सत्यापनकर्ता कर्मियों द्वारा किसानों के फसल बुआई रकबा को असामान्य रूप से बढ़ा दिया गया है।

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