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#PATNA; राजधानी में सुरक्षित नही हैं बेटियां ! हर दिन महिला अ’पराध पर 4-5 मा’मले द’र्ज होते हैं…

हैदराबाद में हुई गैं’गरे’प (Hyderabad Gang Rape) की घट’ना के बाद एक बार फिर से बेटियों की सुरक्षा पर सवाल उठा रही है. महिला सुरक्षा से जु’ड़े तमाम कानून और बहसों के बावजूद देश में अप’राध (Cri’me) की घ’टनाएं कम नहीं हो रही हैं. NCRB रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में हर घंटे में चार ब’लात्कार होते हैं. बिहार की बात करें तो बिहार में भी महिलाओं के साथ ब’लात्कार, छे’ड़छा’ड़, अप’हरण, दहे’ज के लिए ह’त्या एवं प्रता’ड़ना के मा’मलों में वृ’द्धि देखी गई है.

पटना में हर रोज 4 से 5 मा’मले किसी न किसी थाने या हेल्पलाइन में बला’त्कार, छे’ड़छा’ड़ या अप’हरण के द’र्ज होते हैं. 2019 में अब तक महिला उत्पी’ड़न के 433 मा’मले महि’ला हेल्पलाइन में द’र्ज हैं जिसमे सबसे ज्यादा मा’मले डॉमेस्टिक वाइलेन्स के हैं जिनकी संख्या 268 है. दूसरे नंबर पर छे’ड़छा’ड़ के मा’मले द’र्ज हुए है जो 95 है जबकि तीसरे नंबर पर दहेज उ’त्पी’ड़न के मा’मले हैं जिनकी संख्या 56 है यानी कि महिला घर के साथ-साथ बाहर भी सुरक्षित नहीं है। महिला आयोग अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा भी मानते हैं कि हर रोज आयोग में महिला उ’त्पीड़न के मा’मले आते हैं. कई बार पुलिस का रवै’या भी पी’ड़िता के लिए ठीक नहीं होता है जिस कारण पी’ड़िता को आयोग आना पड़ता है.

पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर अगर नज़र डालें तो पट’ना में छे’ड़छा’ड़ के मा’मले आए दिन आते है लेकिन इसके तरीके में बदलाव आए है.पटना सिटी एसपी ने बताया कि महिलाओं का शारीरिक उत्पी’ड़न के लिए साइबर क्रा’इम एक नया माध्यम बन गया है. सिर्फ अक्टूबर 2019 के आं’कड़े को देखा जाए तो एक महीने में 50 मा’मले पुलिस की रि’कार्ड में द’र्ज हुए हैं जो चौंकाने वाले हैं. पुलिस के अधिकारी भी मानते हैं कि ऐसी घट’नाएं हर महीने नोटिस में आती हैं जिन पर पुलिस कार्रवाई भी करती है लेकिन सबसे बड़ी मु’श्किल है कि छे”ड़खानी के अधिकांश माम’लों में लड़कियां पुलिस तक रिपोर्ट ही द’र्ज नहीं करवाती जिसके कारण मन’चले प’कड़ में नहीं आते हैं.

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