झीलें वैसे तो खूबसूरती का पर्याय मानी जाती हैं लेकिन दुनिया की कई झीलें काफी रहस्यमयी भी हैं. इन्हीं में एक है इंडोनेशियाई झील कावाह इजेन. ये दुनिया की अब तक ज्ञात सबसे ज्यादा अम्लीय झील है, जहां पानी का तापमान लगभग 200 डिग्री सेल्सियस बना रहता है, लेकिन झील में सबसे ज्यादा रहस्यमयी है उसका रंग. इसका पानी रात में नीले पत्थर की तरह चमकता है.
इसी साल की शुरुआत में इंडोनेशिया में एक भारी भूकंप आया था, जिसमें बड़ी तबाही मची थी. इस देश में लगातार भूकंप आते रहता है, जिनकी वजह होती है ज्वालामुखी का फटना. दसअसल प्रशांत महासागर के किनारे-किनारे स्थित यह इलाका दुनिया का सबसे खतरनाक भू-भाग है, जिसे रिंग ऑफ फायर भी कहते हैं. दुनिया के कुल एक्टिव ज्वालामुखियों में से 75% ज्वालामुखी यहीं पर हैं. इन्हीं में से एक ज्वालामुखी है कावाह इजेन. इसी नाम से एक झील भी है, जो ज्वालामुखी के पास स्थित है.


झील अपने-आप में इतनी खतरनाक है कि इसके आसपास खुद वैज्ञानिक भी लंबे समय तक रहने की हिम्मत नहीं कर सके (Photo- flickr)
सालों तक रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों को इस फिरोजी रंग का रहस्य पता चला. दरअसल ज्वालामुखी दुनिया के सक्रिय ज्वालामुखियो में शुमार है, जो लगातार खदबदा रहा है. इसमें से हाइड्रोजन क्लोराइड, सल्फ्यूरिक डाइऑक्साइड जैसी कई तरह की गैसें निकल रही हैं. यही गैसें आपस में मिलकर प्रतिक्रिया करती हैं, जिससे नीला रंग पैदा होता है. ये नीला रंग ज्वालामुखी से निकलते धुएं का भी होता है और झील के पानी का भी.
हालांकि झील अपने-आप में इतनी खतरनाक है कि इसके आसपास खुद वैज्ञानिक भी लंबे समय तक रहने की हिम्मत नहीं कर सके. एक बार झील की अम्लीयता जांचने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने तेजाब से भरे इस पानी में एलुमीनियम की मोटी चादर को लगभग 20 मिनट के लिए डाला. निकालने पर देखा गया कि चादर की मोटाई पारदर्शी कपड़े जितनी रह गई थी.
नीला लावा उगल रहे ज्वालामुखी के कभी भी फट सकने की आशंका को देखते हुए इंडोनेशियाई सरकार ने आसपास चेतावनी लगा दी थी. साल 2012 से यहां कोई नहीं आया है लेकिन तब भी ये और झील का पानी लगातार चर्चाओं में रहा. यहां तक कि दू से इनकी झलक लेने के लिए भी दुनियाभर के एडवेंचर प्रेमी आने रहे. खासकर बाली में छुट्टियां मनाने पहुंचे लोग यहां की एक झलक जरूर लेना चाहते हैं.

नीला लावा उगल रहे ज्वालामुखी के कभी भी फट सकने की आशंका को देखते हुए सरकार ने चेतावनी दे रखी है (Photo- news18 English via Twitter)
हालांकि सरकार अपनी तरफ से सावधानी बरतने और ज्वालामुखी या झील के पास न जाने की चेतावनी दे चुकी है. लगभग 15 हजार फीस चुकाकर इनके कुछ पास जाने की हिम्मत करने वाले भी अक्सर थोड़ी दूर जाकर ही वापस लौट आते हैं. इसकी वजह ये है कि हवाओं में किलोमीटरों दूर तक सल्फर और दूसरी जहरीली गैसें फैली हुई हैं, जो सांस लेना मुश्किल कर देती हैं. इससे बचने के लिए गैस मास्क लगाया जाता है, लेकिन ये भी एक समय के बाद खास मदद नहीं कर पाता है.

ज्वालामुखी के असर से अम्लीय झील कावाह इजेन के अलावा एक नदी भी है, जिसे अम्लीयता के कारण काफी घातक माना जाता है. पेरू से जुड़े हुए अमेजन फॉरेस्ट में बहती इस नदी को का सबसे बड़ा थर्मल रिवर कहा जाता है. नदी की खोज भूवैज्ञानिक आंद्रे रूजो (Adrés Ruzo) ने साल 2011 में की थी. बॉइलिंग रिवर, जिसे मयानतुयाकू (Mayantuyacu) नदी के नाम से भी जाना जाता है, की खोज के पीछे आंद्रे रूजो ने काफी मेहनत की. दरअसल आंद्रे बचपन में अपने दादा से उबलने वाली नदी की कहानी सुनते आए थे. वैज्ञानिक दिमाग वाले आंद्रे को यकीन था कि अगर लोककथा में इसका जिक्र है तो ऐसी नदी वास्तव में भी होगी ही.




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