बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर ईवीएम-3 की खरीद में देरी होने के कारण चुनाव संबंधी प्रशिक्षण कार्य अधर में पड़ा है। पंचायत आम चुनाव, 2021 अप्रैल-मई में होना प्रस्तावित है किंतु ईवीएम की खरीद नहीं होने के कारण प्रशिक्षण कार्य अबतक शुरू नहीं किया जा सका है। आयोग ईवीएम की खरीद नहीं होने के कारण भारी दबाव में आ गया है।
पंचायत आम चुनाव को लेकर सभी पंचायतों व वार्डो की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 19 फरवरी तक होना है। वहीं, चुनाव को लेकर मतदान केंद्रों के गठन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। मतदाता सूची व मतदान केंद्रों के गठन के बाद पंचायत आम चुनाव को लेकर पदाधिकारियों व कर्मियों के साथ मतदाताओं का प्रशिक्षण कराया जाना है। इस प्रशिक्षण में उन्हें मल्टी पोस्ट ईवीएम के प्रयोग की जानकारी दी जानी है। जबकि ईवीएम उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती है।
भारत निर्वाचन आयोग छह माह पहले शुरू करता है प्रशिक्षण
विधानसभा व लोकसभा आम चुनाव के छह माह पूर्व ही भारत निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारी शुरू कर देता है। इसमें इवीएम की चेकिंग से लेकर प्रशिक्षण कार्य किया जाता है। ऐसे में पंचायत आम चुनाव के पूर्व ईवीएम नहीं उपलब्ध होने से प्रशिक्षण किस उपकरण से दिया जाए यह स्पष्ट नहीं हुआ है। चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार ईवीएम से चुनाव कराने के लिए सबसे पहले छह माह पूर्व इवीएम की फस्ट लेवल चेकिंग (एफएसएल) करायी जाती है। ईवीएम की एफएसएल कराने में दो माह का समय लगता है। शेष चार माह चुनाव कराने को लेकर पदाधिकारियों को कई स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाता है। बिहार में पहली बार एक मतदाता को ईवीएम के माध्यम से छह मतों का प्रयोग करना है। इसके लिए हर हाल में मतदाताओं का प्रशिक्षण कराना आवश्यक है।
8386 ग्राम पंचायत व 1.14 लाख वार्ड हैं
राज्य में 8386 ग्राम पंचायत और एक लाख 14 हजार वार्ड हैं। मतदाताओं को प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के लिए जिला स्तर, प्रखंड स्तर और पंचायत स्तर पर हजार से अधिक इवीएम की डमी की आवश्यकता होगा। अभी तक न ईवीएम मिला है तो डमी मिलने का प्रश्न ही नहीं है। फिलहाल अगर राज्य निर्वाचन आयोग को ईवीएम उपलब्ध नहीं होता है तो यह आशंका बढ़ रही है कि निर्धारित समय पर पंचायत चुनाव कराना चुनौती भरा साबित होगा।






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