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कांग्रेस नेत्री के बि’गड़े बोल-किसानों को चाहे पैसे दो या श’राब बांटो, लेकिन आं’दोलन चलना चाहिए

किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा के नेता लगातार विवा’दित बयान दे रहे हैं. हरियाणा के कृषि मंत्री के बाद अब कांग्रेस नेत्री विद्या देवी (Vidya Devi) ने किसान आं’दोलन (Kisan Aandolan) में किसानों की मदद को लेकर एक विवादित बयान दिया है. विद्या देवी ने कांग्रेस जिले कार्यकारिणी की बैठक में कहा कि किसान आंदोलन में किसानों की मदद करो चाहे पैसे दान कर या शरा’ब बांट कर. जिस समय उन्होंने ये बयान दिया उस समय कांग्रेस के सफीदों से विधायक सुभाष गांगोली सहित कई अन्य कई नेता भी मौजूद थे.

बता दें कि विद्या देवी जींद के नरवाना से कांग्रेस की सीट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं. बैठक के दौरान विद्या देवी (Vidya Devi) ने कहा कि कांग्रेस जब से हारी है, कांग्रेस का अस्तित्व ही ख़’त्म हो चुका था, लेकिन किसी न किसी तरह से यह आंदोलन दोबारा खड़ा हुआ है, इसको अब हर हाल में चलाना है. उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में किसानों की मदद करो चाहे पैसे दान करो या श’राब. किसानों को श’राब का भी दान कर सकते हैं. जिससे जो भी सहयोग बन सकता है, करो और आंदोलन को आगे बढ़ाओ.

कृषि मंत्री भी दे चुके हैं विवादित बयान

बता दें कि हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल (JP Dalal) ने किसानों को लेकर एक विवादित बयान दिया था. उन्होंने शनिवार दोपहर भिवानी रेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों को लेकर कहा, ‘ये घर में होते तो भी मरते. जो आज घर में हैं, वे नहीं मर रहे क्या? कोई हार्ट अटैक से मरा है, तो कोई बीमारी से.’ उनके इस बयान के बाद हरियाणा की राजनीति में काफी बवाल मचा हुआ है.

किसानों की मौ’त पर कही थी ये भद्दी बात

दरअसल, भिवानी रेस्ट आउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे सवाल किया गया था कि अगर कहीं दुर्घटना में 10 मौतें होती हैं तो प्रधानमंत्री संवेदना जताते हैं, लेकिन 200 किसानों की मौ’त पर भी उनकी ओर से कोई ट्वीट नहीं आया. पत्रकार के इस सवाल पर जेपी दलाल ने कहा कि ये जो 200 किसान मरे हैं, अगर घर पर होते तो भी मरते. उन्होंने कहा, “लाख दो लाख में से 200 छह महीने में नहीं मरते हैं क्या? कोई हार्ट अटैक से मर रहा है, कोई बुखार से मर रहा है.” इसके बाद उन्होंने कहा, “मुझे ये बता दो कि हिंदुस्तान की एवरेज उम्र कितनी है? और साल के कितने म’रते हैं. उसी अनुपात में मरे हैं.”

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