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21 दिन में 50 लाख से अधिक लोगों का कोरोना टीकाकरणः स्वास्थ्य मंत्रालय

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने शनिवार को कहा कि देश में अब तक 54 लाख से अधिक लोगों को कोविड-19 रोधी टीका (Coronavirus Vaccine) लगाया जा चुका है. मंत्रालय ने कहा कि अब तक कुल 54,16,849 लाभार्थियों को टीका लगाया गया है, जिनमें से उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 6,73,542 लोगों को टीका लगाया गया है. इसके बाद महाराष्ट्र में 4,34,943, राजस्थान में 4,14,422 और कर्नाटक में 3,60,592 लोगों को टीका लगाया गया है. इसने एक बयान में कहा कि भारत दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है, जिसने केवल 21 दिन में 50 लाख से अधिक लोगों का कोविड-19 टीकाकरण किया है. मंत्रालय ने कहा, ‘‘पिछले 24 घंटे में 10,502 सत्रों में 4,57,404 लोगों को टीका लगाया गया. अब तक कुल 1,06,303 सत्र आयोजित हो चुके हैं, जिन लोगों को पिछले 24 घंटे में टीका लगाया गया है, उनमें 3,01,537 स्वास्थ्यकर्मी और कोविड-19 के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर काम करनेवाले 1,55,867 कर्मी हैं.’’

मंत्रालय के मुताबिक अब तक कुल 20,06,72,589 नमूनों की जांच हो चुकी है. कोरोना वायरस संक्रमण के जो नए मामले सामने आए हैं, उनमें से करीब 83.3 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, केरल, गुजरात, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे के आंकड़ों के अनुसार, देश में संक्रमण के मामले बढ़कर 1,08,14,304 हो गए हैं और मृतक संख्या बढ़कर 1,54,918 हो गई है. पिछले 24 घंटे में देश में महामारी से 95 और लोगों की मौत हो गई.

कोरोना वायरस के उद्भव पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: अध्ययन
अनुसंधानकर्ताओं ने एक अध्ययन में कहा है कि हो सकता है कि नए कोरोना वायरस और 2002-03 में सामने आए सार्स विषाणु के उद्भव पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव हुआ हो. इसमें यह भी कहा गया है कि हरित गैसों के उत्सर्जन से पैदा हुए वैश्विक संकट से संभव है कि इन रोगाणुओं के वाहक चमगादड़ों की प्रजाति के विस्तार में बदलाव आया हो. ‘साइंस ऑफ द टोटल एनवायरन्मेंट’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि दक्षिणी चीन के यून्नान प्रांत और पड़ोसी म्यांमा व लाओस जलवायु परिवर्तन के कारण चमगादड़ों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी वाले प्रमुख वैश्विक केंद्र हैं.

ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों समेत अन्य वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह क्षेत्र दो विषाणुओं सार्स-सीओवी-1 और सार्स-सीओवी-2 के चमगादड़ जनित पूर्वजों की संभावित उत्पत्ति के साथ मेल खाता है. पूर्व में हुए अध्ययनों के आधार पर अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि इस क्षेत्र में मौजूद कोरोना वायरस परिवार के विषाणुओं की संख्या स्थानीय चमगादड़ की प्रजातियों की प्रचुरता से काफी संबद्ध दिखती है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ये प्रजातियां समृद्ध होती हैं, इस बात की आशंका भी बढ़ सकती है कि इंसानों के लिए संभावित रूप से नुकसानदेह गुणों वाला एक कोरोना वायरस (सीओवी) भी इस “इलाके में मौजूद, संचारित या विकसित” होता है.

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