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शिक्षा विभाग को नहीं मिल रहा 5.8 अरब रुपए का हिसाब, जिला अधिकारी को चिट्ठी लिख मांग रहे जवाब

Patna: बिहार में शिक्षा विभाग ने अपनी तमाम योजनाओं के लिए जो पैसे जारी किए हैं उसका हिसाब नहीं मिला है. प्राथमिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों से चिट्ठी लिखकर उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजने को कहा है. 

विभाग ने सभी जिलों के डीइओ (DEO) से इसके लिए एक कोषांग यानि सेल बनाने के लिए भी कहा है. विभाग के निदेशक डॉक्टर रणजीत कुमार सिंह ने तीन दिन के अंदर सेल बनाने के निर्देश दिए हैं. विभाग ने डीइओ से 20 फरवरी तक उपयोगिता प्रमाण पत्र देने के निर्देश दिए हैं. 

विभाग के निदेशक डॉक्टर रणजीत कुमार सिंह ने कहा है कि जो भी अधिकारी तय समय में उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं जमा करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. 

दरअसल, शिक्षा विभाग ने प्राथमिक स्कूल (Primary School) के लाखों छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग योजना मद में पैसे जारी किए थे लेकिन जिलों में शिक्षा विभाग की तरफ से इसका हिसाब नहीं दिया गया. इन योजनाओं में पोशाक, छात्रवृत्ति (Scholarship), वेतन (Salary), साइकिल (cycle), प्रोत्साहन, परिभ्रमण और भवन निर्माण की राशि शामिल हैं.

विभाग की तरफ से जारी चिट्ठी में साल 2018-19 तक जारी किए पैसे का जिक्र है. एक नजर अलग-अलग जिलों पर जिनके ऊपर करोड़ों का डीसी बिल लंबित है. 

जिला                       लंबित राशि 

पटना                     9,95,30,909 
मुजफ्फरपुर                 3,89,17,922 
बेगूसराय                   2,59,01,063 
नालंदा                     2,44,09,386 
जमुई                      2,42,32,980 
गया                       2,20,76,445 
भागलपुर                   11,92,51,234 

इस तरह प्राथमिक शिक्षा विभाग सभी 38 जिलों में शिक्षा विभाग की तरफ से 5 अरब 80 करोड़ से अधिक के राशि का हिसाब नहीं दिया गया है. 

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