आ’रोपी ने पुलिस को बताया है कि नवम्बर 2020 में 29 तारीख के आसपास रोडरेज की घट’ना हुई थी। उस दिन एयरपोर्ट के रास्ते में एक मोड़ पर रूपेश की गाड़ी से इसका ए’क्सीडेंट होते-होते बचा था। एक्सीडेंट के बाद रूपेश और आरोपी के बीच में वि’वाद हुआ था। आ’रोपी का कहना है कि उस दिन रूपेश ने उसे पी’ट दिया था। आरोपी के पास चो’री की बाइक थी इसलिए वह चुपचाप वहां से चला गया। लेकिन इसके बाद उसने रूपेश की गाड़ी के पीछे अपनी बाइक लगा ली। उसने एयरपोर्ट तक उसका पीछा किया और उनकी गाड़ी का नंबर याद कर लिया। आ’रोपी ने बताया कि घ’टना के तीन-चार दिन बाद फिर उसने रूपेश की गाड़ी देखी। वह तुरंत गाड़ी के पीछे लग गया और उस स्थान तक गया जहां तक गाड़ी गई। उसके बाद कई दिनों तक ऋतुराज ने रूपेश की रेकी की।
रूपेश के डेली रूटीन के बारे में पूरी तरह जानकारी हासिल कर लेने के बाद ऋतुराज ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर उनकी ह’त्या की प्लानिंग की। उनकी हत्या करने से पहले भी चार बार ऋतुराज और उसके साथियों ने रूपेश की हत्या की कोशिश की थी। लेकिन किसी न किसी अड़चन की वजह से वे इसमें कामयाब नहीं हो सके। अंत में 12 जनवरी को उन्होंने रूपेश पर उनके अपार्टमेंट के सामने उस वक्त गो’लियां बरसाईं जब वह एयरपोर्ट से लौटे थे।
जयपुर से भूगोल में बीए आनर्स किया है ऋतुराज ने
रूपेश मर्डर केस में बतौर मुख्य आ’रोपी पकड़ा गया ऋतुराज पढ़ा लिखा है। उसने जयपुर से भूगोल में बीए आनर्स किया है। वह वहां एक बैंक में नौकरी भी कर चुका है। दिल्ली में काल सेंटर में भी नौकरी की थी। 2016 में वह अपने घर लौट आया था। पुलिस के मुताबिक पिछले एक-डेढ़ साल से वह बाइक चोरी की घट’नाओं में लिप्त था। वह अक्सर अपने साथ एक हथि’यार भी रखता था।
पहली बार गोली चलाई
पुलिस के मुताबिक ऋतुराज के परिवार का ईंट-भट्ठा है। घर में कोई आर्थिक समस्या नहीं है। लेकिन ऋतुराज बाइक चोरी जैसी घटनाओं में लिप्त हो गया। वह अक्सर अपने साथ एक हथियार भी रखता था लेकिन रूपेश की हत्या उसके हाथ से हुई पहली हत्या है। इसके पहले उसने कभी हत्या नहीं की थी।
घट’ना के अगले दिन रांची भाग गया था
पुलिस के मुताबिक ऋतुराज को जानकारी नहीं थी कि रूपेश इंडिगो के स्टेशन मैनेजर हैं। उनकी ह’त्या के बाद मीडिया में आई रिपेार्ट्स देखकर उसे इसका पता चला। तब उसे इस बात का एहसास भी हुआ कि उसके हाथों एक ऐसे व्यक्ति का कत्ल हो गया है जिससे प्रदेश में हलचल मच गई है। रूपेश की ह’त्या के बाद बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर उठते सवालों और मीडिया में छप रही खबरों से उसे इसके हाईप्रोफाइल केस होने का अंदाजा हुआ इसीलिए घ’टना के अगले ही दिन वह रांची भाग गया। रांची जाने के बाद वह लगातार रूपेश हत्याकांड से जुड़ी खबरों पर नज़र बनाए हुए था। जब उसे लगा कि घट’ना की तहकीकात ठेके-पट्टे और टेम्पो स्टैंड पर हुए वि’वाद जैसी बातों के आधार पर चल रही है तो उसे आत्मविश्वास हो गया कि वह पकड़ा नहीं जाएगा। इसके बाद वह पटना लौट आया।






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