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Bird Flu : पोल्ट्री उत्पादों के आयात पर रोक बढ़ी, चिकन की मांग घटी, मटन में इजाफा

शिमला. बर्ड फ्लू (Bird Flu) की रोकथाम के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश में दूसरे राज्यों से पोल्ट्री और इससे संबंधित उत्पादों पर रोक जारी रहेगी.प्रदेश सरकार ने इसे एक सप्ताह के लिए और बढ़ा दिया है. दो सप्ताह से हिमाचल में बाहर से आने वाले पोल्ट्री पदार्थो पर रोक लगी है. पंजाब और हरियाणा में बर्ड फ्लू की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. हिमाचल (Himachal Prades) इन राज्यों पर पोल्ट्री उत्पादों के लिए निर्भर है.प्रदेश में अभी बर्ड फ्लू का खतरा अभी बना हुआ है.इस कारण प्रतिबंध को सरकार ने आगे बढ़ा दिया है. जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते तब तक इस पर कड़ाई से नजर रहेगी.

शिमला में मांग में कमी

नगर निगम शिमला ने भी सरकार के आदेशों की पालना करते हुए बाहर से आने वाली पॉल्ट्री की बिक्री पर एक सप्ताह के पाबंदी बढ़ा दी है.नगर निगम शिमला के मुख्य वेटेनरी अधिकारी डॉ नीरज मोहन ने बताया कि सरकार की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि बर्ड फ्लू के चलते पोल्ट्री के आयात पर एक बार फिर से पाबंदी बढ़ा दी गई है जिसके चलते एक सप्ताह तक यह पाबंदी रहेगी.

कारोबारियों और मुर्गीपालकों को किया जा रहा जागरुक
उन्होंने बताया कि हालांकि जिला शिमला के किसी भी क्षेत में बर्ड फ्लू का मामला सामने नहीं आया है लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर सरकार के आदेशों की पालना की जा रही है जिसके चलते अगले सात दिनों तक शहर के भीतर पोल्ट्री का आयात नहीं किया जाएगा. उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू की आशंका के चलते मार्केट में चिकन की मांग घट गई है. इसके चलते निगम के स्लॉटर हाउस में 30 फीसदी ही चिकन कट रहा है, जिसकी सैंपलिंग करके आपूर्ति की जा रही है. इसके अलावा बर्ड फ्लू के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए बाजार और मुर्गी पालकों को पैम्पलेट के माध्यम से जागरुक किया जा रहा है, ताकि बर्ड फ्लू की संभावना के प्रति सतर्क रह सकें.उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू के चलते मटन का कारोबार काफी बढ़ गया है.

मृ’त्यु दर को शून्य तक लाने की कोशिश
बता दें कि करीब दो सप्ताह पहले सोलन जिले में एक हजार मृ’त मुर्गे और मुर्गियां पाई गई थी, जिन्हें किसी ने पड़ोसी राज्य से लाकर फेंका था. बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए हमारी रैपिड रिस्पांस टीमें पौंग बांध क्षेत्र में एक माह से डटी हुई हैं. पौंग बांध क्षेत्र में विदेशी परिदे के मरने का सिलसिला जारी है, जिन्हें दफना दिया गया. अब ऐसे पक्षियों की मौ’त का आंकड़ा पांच हजार तक पहुंच गया. इस मृ’त्यु दर को शून्य तक ले जाने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए जा रहे है.

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