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मुजफ्फरपुर में एईएस से बचाव के लिए दी जाएगी पोषक तत्वों की खुराक

गर्मी में बच्चों को एईएस से बचाने के लिए विभाग की ओर से कवायद चल रही है। बीमारी का अब तक कोई कारण सामने नहीं आने से इस साल भी लक्षण के आधार पर इलाज किया जाएगा। पीएचसी स्तर पर प्रारंभिक इलाज के बाद पीडि़त बच्चे को सदर अस्पताल व एसकेएमसीएच रेफर किया जाएगा। पिछले साल एम्स पटना ने शोध में पाया कि एईएस की जद में आने वाले अधिकतर बच्चे कुपोषित पाए गए। साथ ही यह भी बात सामने आई कि अगर बच्चा रात में भूखे पेट यानी बिना खाना खाए सो रहा तो सुबह में उसे एईएस अपनी चपेट में ले रहा है। इसलिए इस बार नई रणनीति बनी है। जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी डॉ.सतीश कुमार ने बताया कि इस बार की योजना में हर गांव में कुपोषित बच्चे की पहचान कर उसे गुड़ व पोषक तत्वों के लिए दवाएं दी जाएंगी। इसका प्रस्ताव राज्य मुख्यालय को भेजा गया है। वहां से अंतिम मोहर लगने के बाद उसे इस साल जमीन पर उतारा जाएगा। कहा कि इस बार भी आंगनबाड़ी के साथ आशा, एएनएम व अन्य विभागों के लोग जागरूकता में सहयोग करेंगे।

इलाज के लिए सब जगह व्यवस्था

सभी पीएचसी प्रभारी को कहा गया है कि वह अपने अस्पताल में पहले से चिह्नित एईएस वार्ड में बच्चों के इलाज के सभी जरूरी उपकरणों की व्यवस्था कर लें। एक माह के अंदर रोस्टर व दवा की कमी दूर कर ली जाए। मुख्यालय से भी जरूरी दवाएं भेजी जाएंगी।

बीमारी के लक्षण

तेज बुखार के साथ बच्चे को चमकी आना। मूंह से झाग निकलना। अगर बच्चा समय से अस्पताल पहुंचा तो उसे बचाया जा सकता है। इलाज में विलंब से बच्चे की मौत हो सकती है।

वर्ष– एईएस पीडि़त

2020—–43

2019—431

2018—15

2017—-17

2016—-31

2015—–72

2014—-701

2013—124

2012—336

2011—121

2010—-59 

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