रांची. झारखंड में एक तरफ सरकारी लैम्स में धान (Paddy) खरीद बंद है, वहीं दूसरी तरफ लैम्स द्वारा जो कुछ धान खरीदा गया, वह रखरखाव के अभाव में चूहों की भेंट चढ़ रहा है. अन्य वर्षों की तरह इस बार भी राज्य में सरकारी दर पर एक दिसंबर से धान की खरीद शुरू की गई है. किसानों (Farmers) के लिए हर प्रखंड में लैम्स में धान खरीद केन्द्र बनाये गये हैं. जहां किसान धान बेच सकते हैं. मगर इन लैम्स की हालत यह है कि रखरखाव के अभाव और चावल मिल द्वारा समय से उठाव नहीं किये जाने के कारण धान बर्बाद हो रहे हैं.
लेम्प की हा’लत यह है कि गोदामों में रखे धान को चूहे राजा चट कर रहे हैं. चूहे के आतंक से भयभीत कई लैम्स इंचार्ज ने विभाग से गुहार लगाया है. जब न्यूज-18 की टीम ने रांची के कांके के अरसंडे स्थित धान क्रय केन्द्र के गोदामों में पहुंची तो नजारा कुछ इस तरह दिखा. यहां धान का उठाव नहीं होने के कारण गोदाम भरा हुआ है और धान क्रय पूरी तरह बंद है. जिससे किसान बेहद परे’शान हैं.
इसी तरह की स्थिति नामकुम लैम्स में भी दिखी. यहां भी धान गोदाम में चूहों का आ’तंक है. बोरे में बंद किसानों के खून पसीने से उपजे धान को बर्बाद कर रहे हैं. चूहों के आतंक से परे’शान लैम्स मैनेजर का कहना है कि चूहा की परेशानी के साथ-साथ धान की नमी में आ रही कमी से वजन भी कम हो जायेगा, जिसका भरपाई करना मुश्किल है.
दो महीने में मात्र 22 फीसदी धान खरीदा गया
राज्य सरकार अबतक लक्ष्य का महज 22 फीसदी धान ही किसानों से एमएसपी पर खरीद पाई है. राज्य सरकार ने फरवरी तक धानक्रय का लक्ष्य तय किया है. धान खरीद नहीं होने के पीछे का कारण अधिकारी गोदाम में पड़े धान का मिल मालिकों द्वारा उठाव नहीं होने को मुख्य वजह मानते हैं. ऐसे में जो भी धान खरीद की गई है वो रखरखाव के अभाव में गोदाम में बर्बाद हो रहे हैं.






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