बिहार में बढ़ते अपरा”ध को लेकर सीएम नीतीश की लगातार किरकिरी हो रही है। विपक्षी ही नहीं सहयोगी दल भाजपा के नेता भी इसको लेकर हम’लावर हैं। अब भाजपा सांसद व प्रदेश उपाध्यक्ष अजय निषाद ने हाल की घटनाओं पर चिंता प्रकट की है। उन्होंने सीएम नीतीश को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ वाला मॉडल अपनाने की सलाह दी है। जो उन्होंने सत्ता में आते ही अपनाई थी। सांसद निषाद ने लगातार बढ़ रहे अप”राध पर आ’क्रोश जताते हुए कहा कि अगर डीजीपी से अपराध नहीं संभल रहा तो वेे कह दें, जनता अपनी सुरक्षा खुद कर लेगी। लोग तलवार लेकर चलेंं। जिसको आर्म्स लाइसेंस चाहिए, उसको शिविर लगाकर यह मिलना चाहिए। सांसद ने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सात निश्चय योजना से विकास को गति दे रहे हैं। उसी तरह से उनको अप’राध पर लगाम लगाने के लिए उतर प्रदेश वाला योगी मॉडल लागू करना चाहिए। मुजफ्फरपुर में मोबाइल व्यवसायी की ह’त्या, जिम संचालक जॉन की ह’त्या, बैंक लू’ट जैसी घट’ना’ओं पर उन्होंने नाराज’गी प्रकट की है। कहा, इन मुद्दों को लेकर मैं खुद राज्यपाल से मिलने वाला हूं।
पुलिस का खौ’फ पूरी तरह से खत्म
सांसद निषाद ने कहा कि पुलिस का खौ’फ समाप्त हो गया है। इसका असर है कि अब बाजार में आकर अ’पराधी गोली मा’र रहे, बैंक लूट रहे, सोना लू’ट रहे हैंं। पुलिस का मनोबल गिर गया है और अपराधियों का आसमान पर है। इसकी उच्चस्तरीय समीक्षा होनी चाहिए। पुलिस पर जनता का भरोसा कम होना चिंता का विषय है।

केवल दारू पकड़ने में न इस्तेमाल हो खुफिया तंत्र
पुलिस अपने ख़ुफिया तंत्र का इस्तेमाल केवल दारू को पकड़ने में कर रही। यह उचित नहीं है। इसका इस्तेमाल अपराधी को पकड़ने में क्यों नहीं कर रही? इससे जाहिर हो रहा है कि कहींं न कहीं अपराध को संरक्षण मिल रहा है। अपराधी को स्पीडी ट्रायल कर सजा मिलनी चाहिए। जब तक उनके मन में भय नहीं पैदा होता, तबतक अपराध को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस एनकाउंटर करने में क्यों घबरा रही है? सीएम नीतीश कुमार को इसपर गंभीर होने की जरूरत है। वरना, जनता के आक्रोश को झेलना होग

बीच बाजार तक आ रहे अ’पराधी
सांसद ने कहा कि पहले अ’पराधी दिन में बाजार से अलग अपराध की योजना को अंजाम देते थे। लेकिन, अब बीच बाजार में आकर गोली चला रहे हैंं। कहा कि अपराध को अंजाम देने वाले को तो पुलिस पकड़ रही है। लेकिन, अपराध रुकेे इसको लेकर मंथन नहीं हो रहा। अपराध को रोकने के लिए सिस्टम को मजबूत किया जाना चाहिए। हर जिले के लिए पुलिस का विशेष नंबर जारी हो। इसकी निगरानी खुद डीएसपी स्तर का अधिकारी करेंं ताकि पता चले कि जनता के कॉल को कितना रिस्पांस हो रहा है।




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