जमुई. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) भले ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंतित हैं और जल जीवन हरियाली (Jal Jivan Hariyali) जैसे कार्यक्रम लगातार चला रहे हैं. इसको लेकर वो प्रदेश के जिलों में भी यात्रा कर चुके हैं, लेकिन अगर उनके अधिकारी ही लापरवाह हों तो सीएम के सपने कैसे पूरे होंगे? दरअसल, बीते साल 2020 में 10 जनवरी को सीएम नीतीश कुमार जल जीवन हरियाली यात्रा के सातवें चरण में जमुई पहुंचे थे. यहां गिद्धौर प्रखंड के बानाडीह में इस मौके पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ था.
इस दौरान बानाडीह प्राथमिक विद्यालय और कुसमा आहर के चारों तरफ सैकड़ों पौधे लगाए गए थे. लेकिन विभाग के अधिकारी और कर्मी या फिर स्थानीय लोगों की लापरवाही का नतीजा है कि महज 1 साल बीतते-बीतते ही यहां एक दर्जन पौधे भी सही सलामत नहीं हैं. आहर के बांध पर या फिर स्कूल के आसपास के लगे पौधे कहां चले गए किसी को नहीं पता. आहर पर बने हुए बांध की सड़क की ईंट सोलिंग कई जगह उखड़ चुकी है. स्कूल के पास जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक किचन गार्डन भी खो गया है.
गिद्धौर के बानाडीह गांव में अब मात्र पांच या छह पौधे बचे हैं. यही नहीं स्कूल परिसर में लगाया गया जैविक किचेन गार्डेन भी बर्बाद हो गया है. स्कूल परिसर में मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से ब्रह्म पेड़ का भी पौधारोपण किया था, मतलब पीपल, पाकर, बरगद और गूलर के बीच तुलसी का पौधा लगाया गया था. इनमें से मात्र एक पौधा ही सही सलामत है. जिस योजना का उद्घाटन सीएम ने किया था, उस शिलापट्ट से पत्थर भी गायब हो गया है.
जल, जीवन, हरियाली यात्रा को लेकर विभाग, अधिकारी और कर्मी की लापरवाही के बारे में बताते हुए स्थानीय अवध बिहारी और अमोद कुमार ने बताया कि सीएम के यात्रा के समय सारी व्यवस्था की गई थी. लेकिन उनके जाने के बाद ना तो किसी अधिकारी और न ही सरकारी कर्मचारियों ने इस ओर ध्यान दिया. पौधे तो लगाए गए, लेकिन उसमें पानी नहीं डाला गया जिस कारण पौधे सूख गए या बर्बाद हो गए. साथ ही गैबीयन भी खत्म हो गया. इस मामले में जिला उप विकास आयुक्त आरिफ अहसन ने बताया कि इस बारे में मुझे पता नहीं था. जो भी कमियां वहां पर हुई हैं, उसे दूर करा कर सारी व्यवस्था को दुरुस्त कराई जाएगी. जो भी लापरवाह होंगे उन पर का’र्रवाई होगी.






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