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जंगली सूअर के ह’मले में घा’यल बच्ची की अस्पताल में त’ड़प-त’ड़पकर मौ’त, खून के लिए चक्कर का’टते रहे परिजन

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में औराई थाने की भरथुआ पंचायत के मधुबन बेसी गांव निवासी रमेश सहनी की दस वर्षीया पुत्री खुशी कुमारी ने गुरुवार को एसकेएमसीएच में खून के अभाव दम तो’ड़ दिया। वह जंगली सूअर के हमले में गं’भीर रूप से घा’यल हो गई थी। परिजन एसकेएमसीएच से सदर अस्पताल तक दौ’ड़ते रहे, लेकिन उन्हें खू’न नहीं मिला। आखिरकार पूरी रात क’राहने के बाद बच्ची की मौ’त हो गई। 

परिजनों ने इलाज में ला’परवाही का आ’रोप लगाते हुए बताया कि बच्ची को खू’न की आवश्यकता थी, लेकिन चिकित्सकों ने नहीं चढ़ाया। इस कारण उसकी मौ’त हो गई है। मां रानी देवी का आ’रोप है कि वह व अन्य परिजन खून देने के लिए भी तैयार थे, लेकिन स्वास्थ्य कर्मी ने कहा कि उनका खू:न मेल नहीं खा रहा है। वहां से सदर अस्पताल भेजा गया। वहां भी स्वास्थ्य कर्मी खू’न देने में रुचि नहीं दिखा रहे थे, जबकि परिजन खून के बदले खून देने के लिए तैयार थे। रानी देवी ने बताया कि बच्ची पूरी रात कराहती रही और गुरुवार की सुबह उसकी मौ’त हो गई। आरोप लगाया कि डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों की अनदेखी की वजह से बच्ची की मौ’त हो गई है। 

इधर, एसकेएमसीएच के प्राचार्य सह अधीक्षक डॉ. विकास कुमार ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि बच्ची को जंगली सूअर ने गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसे अंदरूनी चोट लगी थी। इस कारण उसका खून रुक नहीं रहा था। इस स्थिति में खून को शरीर के अंदर रोकना जरूरी था। डॉक्टर इसमें लगे थे। खून चढ़ाने की आवश्यकता उस समय नहीं थी। एसकेएमसीएच के ब्लड बैंक में खू’न है। यदि खू’न चढ़ाना होता तो जरूर उपलब्ध कराया जाता। 

बाजार से लौटते समय बच्ची पर जंगली सूअर ने किया था ह’मला 
बुधवार की शाम खुशी मां रानी देवी के साथ बाजार से लौट रही थी। इसक क्रम में जंगली सूअर ने हमला कर दिया। बच्ची के हाथ-पैर और पीठ पर गं’भीर ज’ख्मी हो गया, जिससे काफी खू’न बह गया था। स्थानीय लोगों व परिजन की मदद से उसे एसकेएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। उसका खून इतना बढ़ गया था कि उसे खू’न चढ़ाने की जरूरत थी। 

खून नहीं देने का आ’रोप गलत, परिजन एसकेएमसीएच कर्मी: अधीक्षक
एसकेएमसीएच अधीक्षक का कहना है कि खू’न नहीं देने का आ’रोप गलत है। बच्ची को काफी गंभीर हालत में इलाज के लिए लाया गया था। औराई और सदर अस्पताल के इलाज में काफी समय लग गया था। यहां पहुंचने पर उन्हें परिजनों ने सूचना दी। पीड़ित परिवार का एक परिजन एसकेएमसीएच में नौकरी करता है। चिकित्सकों को निर्देश दिया था कि बच्ची का इलाज बेहतर तरीके से करें।

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