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बिहार मंत्रिमंडल विस्तार: नीतीश कुमार की ओर से BJP के पाले में गेंद फेंकने के क्या हैं मायने

पटना. नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार कब तक होगा ये सवाल बिहार के सियासत में चल ही रहा था कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने यह कह कर राजनीति और गर्मा दी की अभी तो BJP की तरफ़ से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई प्रस्ताव ही नहीं आया है. यही नहीं नीतीश कुमार ने यहां तक कह दिया की अभी तो भाजपा (BJP) से इस विषय पर कोई बातचीत भी नहीं हुई है.

एक तरफ नीतीश कुमार यह बयान दे रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ वैशाली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक चल रही थी. इसमें बिहार प्रभारी भूपेन्द्र यादव, राष्ट्रीय संगठन और प्रभारी सौदान सिंह सहित बड़े नेता मौजूद थे. बैठक में यह फैसला लिया गया की 2021 में भाजपा को आगे कैसे बढ़ाया जाए? हालांकि, इन दोनों बातों में वैशाली की भूमिका महत्वपूर्ण रही. भाजपा ने एक तरफ वैशाली में बैठक की और भाजपा को लेकर बड़ा फैसला किया वहीं नीतीश कुमार भी वैशाली में निर्माणाधीन बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह बुद्धा स्मृति स्तूप के कार्य प्रगति का निरीक्षण करने पहुंच गए. अब इसे राजनीतिक रूप से इत्‍तेफ़ाक कहें या फिर इसके पीछे कोई गहरी सियासत छिपी हुई है.

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के वैशाली में बैठक के दौरान ही वैशाली में नीतीश कुमार का बुद्ध स्मृति स्तूप का कार्य प्रगति देखने आना राजनीतिक हलके में चर्चा का विषय बना हुआ है. वह भी तब जब नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार पर गेंद भाजपा की तरफ फेंक दी थी. उसी के कुछ देर बाद सीएम का वैशाली पहुंच जाना राजनीतिक जानकारों को हैरान कर दिया.

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर काफी दिनों से चर्चा हो रही है. खबर ये भी बताई जा रही है कि नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कुछ शर्त भाजपा के सामने रखी थी. इसी वजह से मंत्रिमंडल विस्तार में देर हो रही है, लेकिन नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी के लिए भाजपा पर ही सवाल खड़े कर दिए. शांति स्थल माने जाने वाले वैशाली में नीतीश और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का एक ही दिन होना आने वाले समय में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर साफ़ करेगा या मंत्रिमंडल विस्तार कहीं खरमास की वजह से 14 जनवरी तक न टल जाए.

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