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बिहार के IAS अफसरों को देना होगा संपत्ति का ब्यौरा, एक महीने के भीतर सरकार को हर हाल में बताना होगा

PATNA :  मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की तरह बिहार कैडर के सभी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों यानी कि आईईएस अफसरों को अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा देना होगा. नीतीश सरकार की ओर से अफसरों को यह आदेश जारी कर दिया गया है. बिहार कैडर के के आईएएस अधिकारियों को वर्ष 2020 की वार्षिक अचल संपत्ति का ब्यौरा 31 जनवरी, 2021 तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन जमा करना होगा.

अफसरों को एक महीने का समय
नीतीश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के अनुसार नए साल में साल 1 जनवरी से 31 जनवरी तक राज्य के सभी आईएएस अधिकारियों को अपने पिछले वर्ष की अचल संपत्तियों की जानकारी एक तय किए हुए फॉर्मेट के मुताबिक सार्वजनिक करनी है. यानी कि अफसरों को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है. आपको बता दें कि इसे IPR यानी इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न का नाम दिया गया है.

ये हैं सरकारी नियम
भारतीय अधिकारियों के लिए अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली, 1968 के नियम 16(2) के मुताबिक अधिकारियों को अचल संपत्ति यानी जमीन, जायदाद, घर आदि के बारे में एक निर्धारित परफॉर्मा पर जानकारी देनी होती है. जिसमें उन्हें ये जानकारी भी देनी होती है कि इस संपत्ति का स्रोत क्या है. इसके अलावा संपत्ति के वर्तमान बाजार भाव की जानकारी भी देनी होती है. इसके लिए आखिरी तारीख हर साल की 31 जनवरी तय की गई है.

IPR नहीं देने पर क्या होगा
आपको बता दें कि अगर कोई अफसर IPR यानी इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल नहीं करता है तो उसकी विजिलेंस क्लीयरेंस को रद्द किया जा सकता है. इसके साथ ही उन्हें पदोन्नति और विदेशों में पोस्टिंग से संबंधित जरूरी NOC(अनापत्ति प्रमाण पत्र) देने से भी रोका जा सकता है. लेकिन DOPT के सूत्रों का कहना है कि वास्तविकता में इन आदेशों का कभी ढंग से पालन नहीं किया जाता. जिसकी वजह से हर साल तमाम अफसर इसी तरह संपत्तियों की सूचना देने में आनाकानी करते हैं.

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