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पीएम मोदी 10 दिसंबर को संसद भवन की नई इमारत का करेंगे भूमि पूजन, 865 करोड़ है लागत, जानिए खासियतें

1911 में ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस के डिजाइन पर दिल्ली वजूद में आई थी। इसके बाद 1921-27 के बीच संसद भवन बना। उस वक्त नए कंस्ट्रक्शन के लिए इंडिया गेट से राष्ट्रपति ‌‌भवन तक के तीन किलोमीटर लंबे राजपथ के आसपास के इलाके की पहचान हुई थी। इसे सेंट्रल विस्टा नाम से जाना जाता है। अब जो रिनोवेशन और नया कंस्ट्रक्शन होने जा रहा है उसे भी केंद्र सरकार ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट ही नाम दिया है। 

<p><strong>नई इमारत की क्यों है जरूरत?</strong><br />
संसद भवन अब पुराना हो चुका है। ऐसे में कई जगह रिपेयरिंग की जरूरत है। एयर कंडीशनर, ऑडिओ-विजुअल सिस्टम, वेंटिलेशन और इलेक्ट्रिसिटी जैसी तमाम चीजों में बदलाव की जरूरत है। वहीं, राज्यसभा और लोकसभा में सिटिंग कैपेसिटी मैक्जिमम लेवल पर पहुंच चुकी है। इस वजह से नई बिल्डिंग जरूरी है। इसके अलावा मंत्रालयों के दफ्तर भी दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर हैं। नए कंस्ट्रक्शन में इसे भी तरजीह दी जा रही है कि सभी मंत्रालय एक ही जगह हों।</p>

नई इमारत की क्यों है जरूरत?
संसद भवन अब पुराना हो चुका है। ऐसे में कई जगह रिपेयरिंग की जरूरत है। एयर कंडीशनर, ऑडिओ-विजुअल सिस्टम, वेंटिलेशन और इलेक्ट्रिसिटी जैसी तमाम चीजों में बदलाव की जरूरत है। वहीं, राज्यसभा और लोकसभा में सिटिंग कैपेसिटी मैक्जिमम लेवल पर पहुंच चुकी है। इस वजह से नई बिल्डिंग जरूरी है। इसके अलावा मंत्रालयों के दफ्तर भी दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर हैं। नए कंस्ट्रक्शन में इसे भी तरजीह दी जा रही है कि सभी मंत्रालय एक ही जगह हों।

संसद की नई इमारत बनाने का कॉन्ट्रैक्ट टाटा को मिला है। इस पर करीब 865 करोड़ रुपए खर्च होंगे। नई संसद पार्लियामेंट हाउस स्टेट के प्लॉट नंबर 118 पर बनाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट के तहत इंडिया गेट के आसपास 10 इमारतें और बनेंगी। इसमें 51 मंत्रालयों के दफ्तर होंगे। 

<p>संसद की नई इमारत के 2022 तक बनने की उम्मीद है। इसके तहत पुरानी बिल्डिंग के दोनों ओर तिकोने आकार में दो बिल्डिंग बनेंगी। पुराने संसद भवन का आकार गोल है।</p>

संसद की नई इमारत के 2022 तक बनने की उम्मीद है। इसके तहत पुरानी बिल्डिंग के दोनों ओर तिकोने आकार में दो बिल्डिंग बनेंगी। पुराने संसद भवन का आकार गोल है।

क्या हैं खासियतें?

– नई इमारत पुरानी बिल्डिंग के पास होगी। दोनों में एक साथ काम होगा। अभी लोकसभा में 590 लोग बैठ सकते हैं, नई लोकसभा में 888 सीटें होंगी। इसके अलावा विजिटर्स गैलरी में 336 लोगों के बैठने का इंतजाम होगा। राज्यसभा में सिटिंग कैपेसिटी 280 से बढ़कर 384 होगी। विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्यादा लोग बैठ सकेंगे। संयुक्त सेशन के वक्त सिर्फ नई लोकसभा में ही 1272 से ज्यादा सांसद बैठ सकेंगे। संसद के हर विभाग के लिए अलग अलग ऑफिस होंगे। ऑफिसर्स और कर्मचारियों के लिए हाईटेक सुविधाएं होंगी। कैफे और डाइनिंग एरिया भी हाईटेक बनाया जाएगा। कॉमन रूम्स, महिलाओं के लिए लाउंज और वीआईपी लाउंज की भी व्यवस्था होगी।

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