गया. कोरोना को लेकर जारी केन्द्र सरकार की नई गाइड लाइन के बाद भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया का महाबोधि मंदिर (Mahabodhi Temple) आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जा रहा है. मंदिर सुबह 5 से 10 बजे और दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक खोला जाएगा, इस वजह से अब बौद्ध श्रद्धालुओं (Boddh Tourist) के साथ ही आम पर्यटकों की आवाजाही में इजाफा हुआ है. बौद्ध भिक्षु मंदिर परिसर एवं बोधिवृक्ष के छांव में ध्यान लगा रहें हैं वहीं बिहार एवं अन्य राज्यों के भी आम पर्यटक भी मंदिर भ्रमण के लिए आ रहें हैं.
कोरोना को भगाने के लिए भी हो रही पूजा
इस अवसर को मंदिर को फूलों से सजाया संवारा गया है. कोरोना काला में घरों में महीनों तक बंद रहने वाले बौद्ध भिक्षु और पर्यटक यहां आकर उत्साहित नजर आ रहें हैं. मंदिर के मुख्य पुजारी भंते चालिंद ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सिर्फ वे और उनके सहयोगी ही मंदिर के गर्भगृह में भगवान की पूजा करते थे पर अब पहले की तरह ही आम श्रद्धालु भी यहां आकार पूजा-पाठ कर कोरोना के प्रभाव के खत्म होने की कामना कर रहें हैं और धीरे-धीरे स्थिति पहले की तरह सामान्य हो रही है.
कोलकाता से अपने परिवार के साथ भ्रमण के लिए आये सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि वो लोग कोरोना एडवायजरी का पालन करते हुए मंदिर भ्रमण कर रहें हैं और यहां का वातावरण उन्हें एक आध्यात्मिक शांति की अनुभूति दे रहा है. महिला पर्यटक हनी सिंह ने बताया कि मंदिर प्रबंधन की तरफ से कोरोना से बचाव को लेकर बेहतर इंतजाम किया गया है. पहली बार मंदिर आकर उन्हें काफी अच्छा लगा और बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान लगाने से उनके मन को अद्भुत शांति मिली.
गर्भ गृह में एक साथ केवल 10 लोगों को जाने की अनुमति
मंदिर की देखरेख करने वाली संस्था बीटीएमसी के सचिव एन.दोरजे ने बताया कि सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक ही श्रद्धालुओं को मंदिर भ्रमण कराया जा रहा है. यहां आने वाले हरेक श्रद्धालु की थर्मल स्क्रीनिंग के साथ ही उनके हाथ को सेनेटाईज किया जाता है. मंदिर के गर्भगृह में एक साथ 10 से ज्यादा लोगों को जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
कोरोनाकाल में सिर्फ महाबोधी मंदिर को करीब 5 करोड़ का नुकसान
बिहार में सबसे ज्यादा स्वदेशी और विदेशी पर्यटक भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया में आतें हैं पर कोरोनाकाल में यहां का पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह से चौपट हो गया है. एक अनुमान के मुताबिक कोरोनाकाल में सिर्फ महाबोधि मंदिर की देखरेख करने वाले बीटीएमसी को ही ऑनलाइन, ऑफलाइन एवं चढावा से मिलने वाले करीब 5 करोड़ की राशि का नुकसान हुआ है, वहीं देशी विदेशी सैलानियों के नहीं आने से बोधगया में अवस्थित सैकड़ो बौद्ध मोनास्ट्री और होटल को भी करोड़ो का नुकसान हुआ है. अब महाबोधि मंदिर के खुलने और पर्यटकों के आवाजाही की शुरूआत होने से यहां के पर्यटन उद्योग से जुड़े हरेक सेक्टर के लोगों की उन्मीदें बढी हैं.




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