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वन नेशन वन इलेक्शन भारत की जरूरत है, इस पर गहन मंथन आवश्यक – संविधान दिवस पर बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली. संविधान दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर वन नेशन वन इलेक्शन की बात पर जोर दिया है. गुरुवार को अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि एक देश एक चुनाव पर बहस बहुत जरूरी है.

मोदी ने कहा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ केवल विचार-विमर्श का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की भी जरूरत है. यह विकास कार्य को बाधित करता है और आप सभी इसके बारे में जानते हैं. हमें इसके बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए.’ पीएम ने कहा कि  लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों के लिए केवल एक मतदाता सूची का उपयोग किया जाना चाहिए. हम इन सूचियों पर समय और पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हैं?

सरदार पटेल की प्रतिबद्धता को प्रणाम करने का दिन – पीएम

इससे पहले पीएम ने कहा कि मैं हर भारतीय नागरिक को संविधान दिवस की शुभकामना देता हूं. मैं संविधान बनाने में शामिल सभी सम्मानित व्यक्तियों को धन्यवाद देना चाहता हूं. पीएम ने कहा कि आज डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद और बाबा साहेब अंबेडकर से लेकर संविधान सभा के सभी व्यक्तित्वों को भी नमन करने का दिन है, जिनके अथक प्रयासों से देश को संविधान मिला है. आज का दिन पूज्य बापू की प्रेरणा को, सरदार पटेल की प्रतिबद्धता को प्रणाम करने का दिन है.

उन्होंने कहा कि आज की तारीख, देश पर सबसे बड़े आतंकी हमले के साथ जुड़ी हुई है. पाकिस्तान से आए आतंकियों ने मुंबई पर धावा बोल दिया था. इस हमले में अनेक लोगों की मृत्यु हुई थी. कई देशों के लोग मारे गए थे. मैं मुंबई हमले में मारे गए सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.प्रधानमंत्री ने कहा कि आज मुंबई हमले जैसी साजिशों को नाकाम कर रहे, आतंक को एक छोटे से क्षेत्र में समेट देने वाले, भारत की रक्षा में प्रतिपल जुटे हमारे सुरक्षाबलों का भी वंदन करता हूं. उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी के रूप में, हमारे लोकतंत्र में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका है. आप सभी लोगों और राष्ट्र के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं. आप कार्यकारी, न्यायपालिका और विधायिका के बीच समन्वय को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

कोरोना के समय में हमारी चुनाव प्रणाली की मजबूती दुनिया ने देखी

पीएम ने कहा कि संविधान के तीनों अंगों की भूमिका से लेकर मर्यादा तक सब कुछ संविधान में ही वर्णित है. 70 के दशक में हमने देखा था कि कैसे सेप्रेशन ऑफ पॉवर की मर्यादा को भंग करने की कोशिश हुई थी, लेकिन इसका जवाब भी देश को संविधान से ही मिला. मोदी ने कहा कि इस वैश्विक महामारी के दौरान भारत की 130 करोड़ से ज्यादा जनता ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया है, उसकी एक बड़ी वजह, सभी भारतीयों का संविधान के तीनों अंगों पर पूर्ण विश्वास है. इस विश्वास को बढ़ाने के लिए निरंतर काम भी हुआ है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के समय में हमारी चुनाव प्रणाली की मजबूती दुनिया ने देखी है. इतने बड़े स्तर पर चुनाव होना, समय पर परिणाम आना, सुचारू रूप से नई सरकार का बनना, ये इतना भी आसान नहीं है. हमें हमारे संविधान से जो ताकत मिली है, वो ऐसे हर मुश्किल कार्यों को आसान बनाती है.

देश के गौरव से बड़ा कुछ नहीं हो सकता- PM

मोदी ने कहा कि समय के साथ जो कानून अपना महत्व खो चुके हैं, उनको हटाने की प्रक्रिया भी आसान होनी चाहिए. बीते सालों में ऐसे सैकड़ों कानून हटाए जा चुके हैं. हमारे कानूनों की भाषा इतनी आसान होनी चाहिए कि सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी उसको समझ सके. हम भारत के लोगों ने ये संविधान खुद को दिया है. इसलिए इसके तहत लिए गए हर फैसले, हर कानून से सामान्य नागरिक सीधा कनेक्ट महसूस करे, ये सुनिश्चित करना होगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहां बड़ी समस्या ये भी रही है कि संवैधानिक और कानूनी भाषा, उस व्यक्ति को समझने में मुश्किल होती है जिसके लिए वो कानून बना है. मुश्किल शब्द, लंबी-लंबी लाइनें, बड़े-बड़े पैराग्राफ, क्लॉज-सब क्लॉज, यानी जाने-अनजाने एक मुश्किल जाल बन जाता है. हर नागरिक का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़े, ये संविधान की भी अपेक्षा है और हमारा भी ये निरंतर प्रयास है. ये तभी संभव है जब हम सभी अपने कर्तव्यों को, अपने अधिकारों का स्रोत मानेंगे, अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे.

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उन्होंने कहा कि जैसे सदन में एक भाव की आवश्यकता होती, वैसे ही देश में भी एक भाव की आवश्यकता होती. सरदार पटेल का ये स्मारक इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जहां कोई राजनीतिक छूआ-छूत नहीं. देश के गौरव से बड़ा कुछ नहीं हो सकता. मारे निर्णय का आधार एक ही मानदंड होना चाहिए और वो है राष्ट्रहित. राष्ट्रहित ही हमारा तराजू होना चाहिए. हमें ये याद रखना है कि जब विचारों में देशहित और लोकहित की बजाय राजनीति हावी होती है तो उसका नुकसान देश को उठाना पड़ता है.

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