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गुप्तेश्वर पांडेय इतने क’मजोर तो न थे जो बीजेपी उनके नाम पर बक्सर की सीट नहीं छोड़ती

बिहार पुलिस के पूर्व मुखिया गुप्तेश्वर पांडेय इतने कमजोर तो नहीं हैं कि उनके लिए बिहार विधानसभा की एक अदद सीट का जुगाड़ नहीं हो सकता था! टिकट न मिलने से दुखी बताये जा रहे पांडेय गुरुवार, 8 अक्टूबर को अपनी सफाई देने मीडिया के सामने आये। उन्होंने मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार का बचाव किया और कहा कि नीतीश कुमार कभी किसी को ठगते नहीं हैं। उनकी कोई मजबूरी होगी!

मुख्यमंत्री के मान-सम्मान का ख्याल रखने वाले गुप्तेश्वर पांडेय के सम्मान का ख्याल न तो जेडीयू ने रखा न बीजेपी ने! यह दीगर बात है कि पांडेय ने नौकरी छोड़ कर जेडीयू ज्वाइन की। नीतीश कुमार का दामन थामा। लेकिन हकीकत तो यह है कि वे बीजेपी के भी उतने ही करीब हैं जितना जेडीयू के हैं। बीजेपी चाहती तो बक्सर की सीट पांडेय के लिए छोड़ सकती थी। नीतीश भी बीजेपी से बक्सर की सीट मांग सकते थे। पांडेय बक्सर के निवासी हैं और उस इलाके में उनकी पकड़ है। अपनी पहचान है। बीजेपी का यह कहना कि बक्सर सीट छोड़ने पर विद्रोह हो जाता, हजम होने वाली बात नहीं है। उस सीट और क्षेत्र पर जिस ब्राह्मण बिरादरी का दबदबा बताया जाता है, पांडेय भी तो उसी बिरादरी से आते हैं।

जानकारों का कहना है कि पांडेय चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके थे। उन्होंने 10 हजार रुपये का NR (नाजिर रसीद) भी कटवा रखा था। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को यह रशीद कटवाना होता है, तभी नॉमिनेशन पेपर मिलता है। बक्सर में पांडेय का चुनाव कार्यालय भी तैयार था। जिस पर अब ताला लग गया है

जानकारों का कहना है कि पांडेय की दावेदारी बीजेपी और जेडीयू के बीच जारी आंतरिक खींचतान की भेंट चढ़ गयी। बीजेपी ने नीतीश को नीचा दिखाने के लिए बक्सर सीट छोड़ने से मना कर दिया। पिछली बार 2009 में जब पांडेय ने वीआरएस लिया था, तब तत्कालीन सांसद स्वर्गीय लालमुनि चौबे अड़ गये थे। पार्टी का एक बड़ा हिस्सा भी चौबे का टिकट काट कर पांडेय को लोकसभा का उम्मीदवार बनाने के खिलाफ था। चौबे जिनके रिश्ते पूर्व प्रधानमंत्री मरहूम अटल बिहारी वाजपेयी से काफी करीब थे,उनकी मुखालफत करने की हिमाकत किसी ने नहीं की। नतीजा हुआ कि पांडेय बड़ी मुश्किल से वीआरएस रद्द करवा कर नौकरी में लौटे । नीतीश कुमार मुख्यमंत्री न होते तो नौकरी में उनकी वापसी शायद संभव न होती।

पिछले महीने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेने वाले आइपीएस अफसर गुप्तेश्वर पांडेय अगले साल 28 फरवरी को रिटायर होने वाले थे। रिटायर होने से पहले उनके राजनीति में उतरने की खूब चर्चा चल रही थी। हालांकि पांडेय लगातार इसका खंडन कर रहे थे। एक दिन अचानक जब उन्हें बक्सर के जेडीयू जिलाधयक्ष के साथ बक्सर में देखा गया। दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने लगी तो, पांडेय ने सफाई दी कि मैं , मेरे चुनाव लड़ने की अटकलों का जवाब देते-देते परेशान हो चुका हूं। लेकिन दो दिन बाद ही 22 सितंबर की रात अचानक खुलासा हुआ कि सरकार ने पांडेय का वीआरएस स्वीकार कर लिया है।

तब पांडेय ने चुनाव लड़ने के सवाल पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी थी! कहा था, राजनीति में उतरने का फैसला दो दिनों के भीतर बता दूंगा! आखिरकार तीन दिनों बाद उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता दिलाई गयी! उसके बाद से कयास लगाये जा रहे थे कि पांडेय जी बक्सर से लड़ेंगे कि वाल्मीकिनगर जायेंगे! जानकारों का कहना है कि इस बार भी बक्सर में उनकी दावेदारी का विरोध बीजेपी से ही हो रहा था! एक बड़े नेता को अपना भविष्य खराब होता नजर आ रहा था।

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