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मुजफ्फरपुर में बाढ़ राहत के नाम पर खूब हुआ खेल, एक ही परिवार के 14 लोगों को बांटी गई राशि

जिले में इस बार बाढ़ ने जिस अनुपात में तबाही मचाई उसी अनुपात में बाढ़ राहत के नाम पर लूट हुई। इसका एक उदाहरण बंदरा में देखने को मिला। जब एक ही परिवार के नौ ताे कहीं एक ही परिवार के 14 लोगों को राहत राशि दे दी गई। इसको लेकर जब मुखिया संघ ने आमरण अनशन किया तो इसके बाद जांच की प्रक्रिया आरंभ की गई है।

अनशन समाप्त होने के बाद इससे संबंधित सात सूत्री मांगों पर कार्रवाई करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बाढ़ राहत राशि वितरण में अनियमितता को लेकर प्रखंड मुख्यालय के सभागार में सूची की जांच शुरू की। सीओ रमेश कुमार ने बताया कि मुखिया संघ द्वारा बाढ़ राहत राशि वितरण में अनियमितता की जांच की मांग पर जांच हत्था पंचायत से शुरू की गई। सूची जांच के लिए प्रखंड के शिक्षक को प्रतिनियुक्त किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। वहीं, पटसारा पंचायत के शत्रुध्न सहनी ने सीओ को आवेदन देकर पंचायत के वार्ड नंबर 10 में एक परिवार में नौ तथा एक परिवार में 14 लोगों को बाढ़ राहत राशि देने की शिकायत की। वहीं, दूसरेे प्रखंड और अन्य पंचायत के लोगों का नाम समेत 90 लोगों को चिह्नित कर जांच की मांग की गई।

बाढ़ राहत राशि को लेकर अनशन पर बैठे पीडि़त

साहेबगंज प्रखंड परिसर में वासुदेवपुर सराय पंचायत के दिनेश कुमार, चिंता देवी,सुनीता देवी, संतोष कुमार, बुधिया देवी तथा हेमंती देवी ने बाढ़ राहत राशि से वंचित लोगों का नाम सूची में जोडऩे को लेकर अनशन प्रारंभ किया। उनका कहना है कि बाढ़ राहत सहायता राशि की सूची में छूटे बाढ़ पीडि़तों का नाम अविलंब शामिल किया जाए, जिन बाढ़ पीडि़तों का डाटा इंट्री कर दिया गया है उन्हें अविलंब भुगतान किया जाए, बाढ़ राहत राशि के नाम पर वसूली पर रोक लगाई जाए, पंचायत के बाहर के लोगों के नाम पर पैसा भेजकर बाढ़ राहत राशि की लूट की जांच कराई जाए। सीओ राकेश कुमार ने बताया कि प्रखंड में 27 हजार 635 लाभुकों का नाम इंट्री किया गया जहां 25 हजार 284 लोगों की अर्जी को स्वीकृति प्रदान करते हुए भुगतान खाते में भेज दी गई। शेष लाभुकों की स्वीकृति आना बाकी है। स्वीकृति मिलते ही भुगतान कर दिया जाएगा। 

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