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दफ्तर में तो’ड़फो’ड़ः BJP-संघ के बाद अब उद्धव के साथी शरद पवार भी कंगना के साथ आए

मुंबई
कंगना रनौत के खिलाफ बीएमसी का ऐक्शन लेना उद्धव ठाकरे सरकार पर उल्टे दांव की तरह पड़ा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अलावा विपक्षी दल बीजेपी और सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आने के बाद अब सत्ताधारी गठबंधन की साझीदार एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने भी इस फैसले पर सवाल उठाया है। पवार ने कंगना के मुंबई स्थित कार्यालय पर बुलडोजर चलने के बाद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे बेहद गैर-जरूरी ऐक्शन करार दिया है।

बता दें कि फिल्म ऐक्ट्रेस कंगना रनौत और शिवसेना सरकार के बीच जुबानी जंग बुधवार को तोड़फोड़ तक पहुंच गई। कंगना के मुंबई पहुंचने से पहले बीएमसी उनके ऑफिस जेसीबी लेकर पहुंच गई। अवैध निर्माण के आरोप में ऐक्शन लेते हुए बीएमसी ने कंगना के ऑफिस की बिल्डिंग को गिराना शुरू कर दिया। डिमोलिशन की इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दल बीजेपी ने शिवसेना पर जमकर हमला बोला। सोशल मीडिया पर भी उद्धव ठाकरे सरकार को इसे लेकर आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा।

उद्धव को पवार का भी साथ नहीं
इस बीच उद्धव ठाकरे सरकार को उनके ही साझीदार शरद पवार का साथ भी नहीं मिला है। बुधवार को पवार ने बीएमसी के इस ऐक्शन को गैरजरूरी बताया। एनसीपी चीफ ने कहा कि मुंबई में कई ऐसी अवैध इमारतें हैं। ऐसे में बीएमसी अधिकारियों ने ऐसा निर्णय क्यों लिया? यह देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बीएमसी की कार्रवाई ने गैरजरूरी तौर पर लोगों को अवसर दे दिया है कि वे इस पर बोलें। शरद पवार की इस टिप्पणी से ठाकरे सरकार की किरकिरी होना तय है।

कंगना का पलटवार
वहीं कंगना ने अपने ऑफिस पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद शिवसेना सरकार पर हमला बोलते हुए उन्हें ‘बाबर’ करार दिया है। कंगना ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘मणिकर्णिका फिल्म्स में पहली फिल्म अयोध्या की घोषणा हुई। यह मेरे लिए एक इमारत नहीं राम मंदिर ही है। आज वहां बाबर आया है। आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा। राम मंदिर फिर टूटेगा। मगर याद रख बाबर, यह मंदिर फिर बनेगा।’

बीएमसी पर है शिवसेना का कब्जा
बता दें कि बीएमसी पर शिवसेना का कब्जा है। इसके अलावा राज्य में भी पार्टी सत्ता में है। बीते दिनों शिवसेना नेता संजय राउत और कंगना रनौत के बीच जुबानी जंग ने सियासी रूप ले लिया। कंगना ने मुंबई को पीओके बताते हुए असुरक्षित होने की बात कही तो हिमाचल प्रदेश सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दे दी।

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