पूजन की विधि
पूजन के लिए जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित किया जाता है और फिर पूजा करती है. इसके साथ ही मिट्टी तथा गाय के गोबर से चील व सियारिन की प्रतिमा बनाई जाती है. जिसके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है. पूजन समाप्त होने के बाद जिउतिया व्रत की कथा सुनी जाती है. पुत्र की लंबी आयु, आरोग्य तथा कल्याण की कामना से स्त्रियां इस व्रत को करती है. कहते है जो महिलाएं पुरे विधि-विधान से निष्ठापूर्वक कथा सुनकर ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देती है, उन्हें पुत्र सुख व उनकी समृद्धि प्राप्त होती है.
नहाय खाय
आज नहाय-खाय के साथ जिउतिया व्रत शुरू हो होगा. जिउतिया व्रत में नहाय खाय की विशेष महत्व होता है. महिलाएं इस दिन सुबह गंगा स्नान करती हैं. इस दिन सिर्फ एक बार ही सात्विक भोजन करना होता है. नहाय खाय की रात को छत पर जाकर चारों दिशाओं में कुछ खाना रख दिया जाता है.
निर्जला व्रत
इसे खुर जितिया कहा जाता है. निर्जला व्रत होता है.
पारण का दिन
आखिरी दिन पारण किया जाता है. दान दिया जाता है.
मिथिला पांचांग के अनुसार जितिया व्रत
9 सितंबर दिन बुधवार को नहाय-खाय, रात्रि में शुद्ध भोजन करना है. भोर में सरगही गुरुवार 10 सितंबर को उदया तिथि अष्टमी में व्रत किया जाएगा. शाम को पूजन होगा. 11 सितंबर दिन शुक्रवार को सूर्योदय के उपरांत प्रात: काल में पारण होगा.

तीन दिन तक चलता है यह व्रत
यह व्रत तीन दिन तक चलता है. पहला दिन नहाए खाए , दूसरा दिन जितिया निर्जला व्रत और तीसरे दिन पारण किया जाता है. इस साल जितिया व्रत 10 सितंबर, बृहस्पतिवार को किया जाएगा. इसका पहला दिन नहाए खाए के रूप में मनाते हुए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.
तीज और छठ पर्व की तरह जितिया व्रत की शुरूआत भी नहाय-खाय के साथ ही होती है. इस पर्व को तीन दिनों तक मनाये जाने की परंपरा है. सप्तमी तिथि को नहाय-खाय होती है. उसके बाद अष्टमी तिथि को महिलाएं बच्चों की उन्नति और आरोग्य रहने की मंगलकामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं. वहीं, तीसरे दिन अर्थात नवमी तिथि को व्रत को तोड़ा जाता है. जिसे पारण भी कहा जाता है.

पंडित सुनिल सिंह की मानें तो जितिया व्रत इस वर्ष 10 सितंबर को पड़ रहा है. जिसका शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से शुरू हो जायेगा. जो अगले दिन यानि 11 सितंबर को 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. इस व्रत को पारण के द्वारा तोड़ा जाएगा जिसका शुभ समय 11 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक होगा.
आज है नहाय-खाय
जितिया व्रत के पहले दिन यानी नहाए खाए को सूर्यास्त के बाद कुछ नहीं खाना चाहिए. ऐसा करने से व्रत खंडित हो जाता है. इसका फल संतान को मिलता है तो व्रत खंडित होने पर बुरे प्रभाव भी संतान को झेलने पड़ते हैं.




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