मुजफ्फरपुर। जिले में नदियों के जलस्तर में गि’रावट जारी है। वहीं बागमती, बूढ़ी गंडक और लखनदेई खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पिछले 24 घंटे में बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में 0.12 सेमी की गिरा’वट हुई है। रविवार को सिकंदरपुर में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान 52.53 मीटर से 0.40 सेमी उपर 52.93 मीटर दर्ज किया गया। 30 अगस्त को बूढ़ी गंडक नदी का उच्चतम जलस्तर 53.91 मीटर दर्ज किया गया था। 11 दिनों के भीतर इसके जलस्तर में 0.98 सेमी की गि’रावट दर्ज की गई है।
सिकंदरपुर में जलस्तर कम होने के बाद अब शहर पर छाए खतरे के बादल समाप्त हो गए हैं।
हालांकि मुरौल के दलौल घाट में बूढ़ी गंडक नदी खतरे के निशान 48.25 मीटर से 2.05 मीटर ऊपर बह रही है। यहां का जलस्तर 50.30 मीटर दर्ज किया गया है। यह वर्ष 2019 के सर्वोच्च जलस्तर 50.18 से अभी भी 0.12 सेमी अधिक है। यही वजह है कि सकरा और मुरौल के इलाकों में अभी बाढ़ की स्थिति गंभीर है।

उधर, कटौझा में बागमती नदी के जलस्तर में 20 सेमी की गिरावट हुई है। हालांकि यह अब भी खतरे के निशान से 1.07 मीटर ऊपर बह रही है। रविवार को इसका जलस्तर 54.80 मीटर दर्ज किया गया। जबकि, बेनीबाद में बागमती नदी डेंजर लेबल 48.68 मीटर से 0.90 सेमी ऊपर है। यहां जलस्तर 5 सेमी की गिरावट के साथ 49.55 मीटर दर्ज किया गया। रेवाघाट में गंडक नदी का जलस्तर 53.71 व अहिरवलिया में 58.60 मीटर दर्ज किया गया। कुढऩी के शाहपुर मरीचा में नून नदी खतरे के निशान 50.25 मीटर से 1.38 मीटर नीचे बह रही है। यहां का जलस्तर 48.60 मीटर, गायघाट के बोराबारी में लखनदेई नदी का जलस्तर खतरे के निशान 42.00 मीटर से 1.33 मीटर ऊपर बह रही है। यहां का जलस्तर 43.33 मीटर दर्ज किया गया।




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